विनोबा के पत्र | Vinoba Ke Patra

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
302
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जमनालाल बजाज के नाम १५लेखन-वाचन १1 घटा
पत्र-व्यवहार १। घटा /+ ४ घटें
व्यान-चितनं १ घटा
अव्यापन ६ घटा न्न्६्घटें
कुल ३० घटें
भगवान ने २४ घटे दिये, उसके चरखे ने ३० किये ।
विनोबा के प्रणाम
११
सवानगी भिवापुर, ५-१२-३५
श्री जमनालालजी,
श्री पोतनीस के साथ अनेक विपयों पर वहुत वाते की । मुख्य वात
विवाह् के वारे मे उनकी मनोभूमिका जान लेना गौर उस सवघ मे अपने
विचार सूचित करना था 1 विवाह्-सवधी चर्चा का जो निप्कयं निकला
वह उन्होंने मुझे लिखकर दिया हैं । उसकी नकल साथ में हू ।*
उनके साथ वात करते हुए किसी भी व्यक्ति का उल्लेख मैने नहीं
किया । लडकी के माता-पिता के विचार जाने वरगर इस प्रकार से उल्लेख
करना मुझे ठीक नही लगा । अव लडकी के पिता को पोतनीस के विचारों
की नकल भेज दगा । मापको पोतनीस के सायं का सवव उत्तम लगता
है, यह आपने मुझसे पहले ही कह दिया हैं । आपकी भी सम्मति उसके साय
सूचित करूंगा । सम्मति भा जायगी तो फिर पोतनीस से पूछा जा सकेगा ।
ऐसे सवालों के सबब में पहले से ही किसीके साथ चर्चा करना मुझे
नापसद हैं । इसलिए मेरा यह पत्र व्यक्तिगत समझा जाय । आपकी जान-
कारी के लिए छिखा है ।
साथ के पत्र के अक १ की भाषा कुछ कठिन है । किन्तु जिस परिभाषा
मे चर्चा हुई उसी परिभाषा मे वह लिखा हैं ।
विनोवा के प्रणाम
१ श्री पोत्तनीस का पत्र नीचे लिखे अनुसार है--
पुज्य विनोवाजी,
(१) विवाह के वारे मं मेरी मनोवृत्ति तटस्य रही तौ अपरिनिष्ठिट
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