डॉक्टर सर जगदीशचन्द्र बसु और उनके आविष्कार | Doctar Jagadhish Chandra Basu Aur Unake Aavishkar

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Doctar Jagadhish Chandra Basu Aur Unake Aavishkar  by सुखसम्पत्तिराय भंडारी - Sukhasampattiray Bhandari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७) बाबू भगवानदास फरीदूपुर जिले के सब-डिव्हीजनल अफसर थे ॥ आपने इस जिले के कई डाकुओं को गिरफ्तार किया था. एक समय आपने इन डाकूओं के प्रधान नेता को गिरफ्तार किया । इस डाकू को कई वपि की सजा हुई । जब यह डाकू जे से छूटा तब वह बाबू भगवानदासके पास आया, और अपने उद्रनिर्वाह के अर्थ कोई काम बताने के ठिए उनसे प्राथना की । बाबू भगवानदासने उसे अपने पुत्र जगदीश की देखभाल के लिए उसे नौकर रसिया । इस डाकूके विषयमें खुद डॉ० बसु लिखते हैं-- ५ मेरे पितनि केवर मेरे किए उसे नौकर रखलिया । मेरी उम्र इस वक्त चार वर्ष की थी । वह अपन कन्धेपर निठलाकर मुझे देहाती पाठशालामें ठलेजाया करता था । कोई भी धाय ढाकुओं के इस भूतपूर्व नेतासे बढ़कर, जिसका कामही एक वक्त स्न करना ओर टोगोको हानि पहुचाना, रहा हे, अधिक सौम्य नक हो सकती । इस वक्त उसने रान्तिमिय जीवन धारण कर छया था; पर वह अपनी पुरानी वातोको भला न था ।इस डाकूने डकेतियों में जो जो पराक्रम किये जिन जिन बड़ाइयों में हिस्सा लिया, उसके कई साथी जुझते ज़ुझते जिस प्रकार मरें या मरते मरते बचे, इन सब वातौ को वह मञ्चे सुनाया करता था । ययपि इस डाकूराजके मन में देश के आईन के प्रति कुछ भी आद्र भाव नहीं था, पर उसने कभी किसी के साथ विश्वासघात नहीं किया । उसनें अपने प्रति औरोंके विश्वास को पूरी तरह कायम रक्खा उसके इस गुणका परिचय कई दफा मिला । ” केम्ब्रिजमें अध्ययन । हम ऊपर लिख चुके हैं कि डेक्टिर बसुकी प्राराम्मिक शिक्षा ग्रामीण पाठशाला हई थी । इसके बाद उच्च शिक्षा आपने कठकत्तेमें =)




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