गीत - फ़रोश | Git Pharosh

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutBhawani Prasad Mishra
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
204
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about भवानी प्रसाद मिश्र - Bhawani Prasad Mishra
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मैदान में ऊगने के लिए टेरें !
जाने-अनजानेसंकोच की एक खरोंचहम पर हावी है,रुकी हे जिसके सवबवह होनहारजो अवरयंभावी हैहम उसकी मदद नहीं करते
सिफं मुह् ताक्ते हवह हमको पुकारती हैहम बगलें झाँकते हें !
हमारी आँखों मेंनींद के तिनके गड़े हेहम उससे बोले बिनाअपने बिस्तरों पर पड़े हे !
समय के ज्वार परहमने नींद कोमाना हे मल्लाह !होनहार पुकार कर कह रही है
कि आह,ऐसे मुर्दों को लहरें ज्वार की
बिना प्यार केकिनारों पर फेंक देती हे
और जागने वाले,सुनने वाले,करने वाले के चरणों में
माथा टेक देती हें !छह गीत-फ़रोदा
User Reviews
No Reviews | Add Yours...