महाभारत अठारहो पर्व्व | Mahabharat Atharho Parvv

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Mahabharat Atharho Parvv  by सबलसिंह चौहान - Sabalsingh Chauhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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९. > ८.४ > < ० <. ०९ > ९ > ९८ ` ह > ९ > ९ > ~: ७ > ८ » › < © | २ | ६० महाभारत भाषा डरे कै भि । नमि + कि 9 बचे १ क 1 भि 1 + एः सापड बिग « प + हु भशि न दि + + पः 4१ हि) + कि १, शंतल॒ मोहे देखत नारी ॐ तव्‌ गङ्गापन कहो विचारी ॥ है? कोन रूप बन हेठ हो. काहा क कहो सत्य सो हमहीं पाहा ॥ है हा-गङ्ख क्यो बात असि, देवाङ्गन' हम जान 1 9 {६ वाचा बध सोई परूष,कन्या कहा वखान ॥ # गजा हित वाचा कीन्दी.ॐ तप गङ्गा यह बोल लीन्दीं ॥ कोरा कम करत जब राञ्ज % ५ भङ्ग देव जनि पाञ॥ तदिन हमहि न हो राजा % यहि बाचामो बद काजी ॥&. राजा घर को लं राये $ हर्षवत बधाय बजबायै।॥ ॥ ९. > ९ > त © ¢ ९ > ९ - 2 जा रहे हषं मन माहीं % परमद. सों कासर जाहीं ॥ हतक दिन बीते यहि मोती ॐ बालक एकं गम जन्माती ॥ भ राजा हरं ` बहुत मन कीन्हा $ वहत॒ दान्‌ किनकहं दीन्हा ॥ गङ्गा कम अचरा सारा % बालक लकः ,जलमह डरा ॥ $ दंत प्राण बालक के गयऊ 9 पिस्मय मनमहं राजा मयञ॥ थे कत नहीं कलु बाचावापे ॐ रहा दुःख दिरदयमदहं सापे ॥ 1 दाहा-याह प्रकार सो गग तव, सात पत्न जलडीर । ९ ॥६ वाचा बेघ हित राजा, महा दखितसेभार ॥ € चष्टम गभहि भा संचारा % तब शंतनु बिनती . अनुसारा ॥ तात पत्र के नाशे प्राना ॐ याहि पुत्र हमको देर दाना॥ € टसिकं गङ्गा तब यह कहीं र इतने दिन कम्हरे सग रहो॥ पराचा हुल आज भा यानी हमद गङ्गा कहत वामो ॥ 4 ष्टम राज आप -बचायां $ यह कनिष्ठ जो म याया ॥ $ यह वृत्तान्त; कहं तोहि पदीं % रजा सुना कथा मनमाहीं ॥ मधे बशिष्ठ की शाही 8 आधाबास हरण कर ताह ॥ ६ सही पापशाप उन दीन्हो ह मानष कर्म चोर इन कीन्हा ॥ ताते शाप ले समुदा % यदै कनिष्टं हरण कर्‌ माई ॥ 9 ६ दाहा-यहे हेतु हम मनुष तने, गगा कहत विचार । ६ ^ परडपकार के कारणे, मेरोहे साध तुम्हार ॥ © < कह कार हा कार - का के कान कार का : ‰ ९ ` 22 ९ 4 ९ (न




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