श्री श्री महाभारत | Shree Shree Mahabharat

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Shree Shree Mahabharat by सबलसिंह चौहान - Sabalsingh Chauhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आदिपर्व्य । । । १९ `. बहुत दिना तब बौतिभे, विधि परपच्च उपांड। धोमर एक अखेटकहं, मचक्छिहेत्‌ तहं जाद्‌ ॥ ` ओंहो सबच्छि: जालमहं परो। दौरष मच्छि देखि सुख करौ ॥ ` दासाराप्र तहकर राऊ। धौमर सङ्क ले गये तिहि ठाऊ ॥ राजा मच्छि देखि विस्तारा । तब सच्छौोकर उदर विदारा ॥ तामनु उदर जो हैखि शुवारा । कन्या एक अस्‌ एक ङुसारा ॥ राजहि सन भो हषं अपारा । वोच्यड बचन समय अनसारा ॥ भच्छदैश पत्ति राजा सों! निश्चय राजा লালন होड ॥ कन्या व्वयप केवटकोी दीन्हा । सच्छोदसे नाम व्याडि कौन्हा ॥ बहुत कहे केवट्सों राऊ। केवट पालत कन्या भाऊ ॥ सात दक्ैकौो कन्या यय । नदौसाहिं सो कन्या गय ॥ - केवट च्छा तनसो गह । नाव घाटमें कन्या रहो॥ - यहि प्रकारते राजा, सुनो और विस्तार । त्यहि सारग पाराशर, आयो जो पगु धार॥. नदीघाठ,. पाराशर जाई। मच्छीदरिको देख्यय आई॥ कन्या देखि सोहि मुनि गयऊ। कामातुर पाराशरं कहेऊ ॥ 'लघ्न देखि ऐसा सुनि ताही। जच्य हि एत्र सो परिडित आहो ॥ कंन्यापाहि कहा सुनि वाता। सरिताघाट काम संख्याता॥ कोम जुः अनौ पञ्डशर मारा । दस्रौ सानहु वचन हसारा ॥ रतिदानहि दै. हमको नारौ । सुनि .कन्या लजा भद मारौ कन्या कहां बाल तन मोरा । जानं. काह कामगति तोया ॥ = 5 द्वकम, स




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