परवर्ती हिन्दी कृष्णभक्ति - काव्य | Paravarti Hindi Krishnabhakti Kavy

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
54 MB
कुल पष्ठ :
488
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अनुक्रमभूमिका ‡ डँ विजयेन स्नातक ७-१०
भ्रामुख ११-१७
अध्याय--२१परम्परा ओर पृष्ठभूमि २५-५७मध्ययुगीन-भक्ति साहित्य श्रौर कष्णचरित--कृष्ण चरित के ललित
पक्ष को प्रधानता, पुराण सौर कुष्ण चरित, भागवत : कृष्ण-कान्य का आधार
ग्रंथ, पौराणिक युग के उपरान्त धार्मिक गतिविधि, भक्ति का दक्षिणी-
प्रवाह ओर आलवार संत, भक्त आचार्यो का आविर्भाव ।कृष्ण भक्ति के प्रेरक सम्प्रदाय--रविस्दाके-दस्प्रदाय, वल्लभ-सम्प्रदाय,
चेतन्य-सम्प्रदाय, राधावल्लभ-सम्प्रदाय, हुरिदासी-सम्प्रदाय, आलोच्य युग
मे अविच्छिन्न परम्परा)युग-प्रवाहु--राजनीतिक गतिविधि, ब्रजप्रदेश पर प्रभाव, जाट ओर
मरहठा शास्तन, उन्नीसवीं शती ओर नवीनचेतना का प्रसार, सामन्ती
जीवन की छाया, सामाजिक और आर्थिक जीवन, धार्मिक वातावरण ।साहित्गिण पृष्ठभुसि--पुर्ववर्ती प्रभाव की प्रक्रिया, काव्य-परम्पराएँ
और उनका प्रभाव, संत काव्यघा रा, थ्रे माउणानक-करव्यघ् रा, रास-काव्यघा रा,
लौकिक काव्धधाराएं |करुष्णभक्ति-कृव्य् की परम्पर रोखहकी शती के पूवे, जयदेव कृत
गीतगोविन्द, कृञ्णचरित के एबन्घात्मक यत्न, विद्यापति ।हिन्दो कृष्णमक्ति-काव्य--सूर पूवं कष्ण-काव्य का प्रश्न, साम्प्रदायिक
कुष्णभक्ति-काव्य, दस्परदाय-दुक्त छष्ण-कव्य ।न दमन
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