परमात्माप्रकाश प्रवचन तृतीय भाग | Paramatmaprakash Pravachan Vol. - Iii

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Paramatmaprakash Pravachan Vol. - Iii by श्री मत्सहजानन्द - Shri Matsahajanand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हद {--६९ १३ म श्रपने झापको भूलकर श्र॑पती निरतर हिंसा करता चलाश्रा रदा । „ इनं जीव सुधर्टोको कभी बहुत सिखाया मी जाता हैं । पुंदूगल भिन्त 8 श्रात्मा भिन्न है । धार्मिक समारोददोंसे कभी-कभी मन भी बदलने की फोशिश फी जाती है) पर बाद रे मोह उस समय भी और उसके बाद भी तू मोहसे रंगा हुआ बना रहता है। सुधाने .खब सीखा पिंजड़ेमे घन्द्‌ होने की स्थिति, रे ! सुवा चुम भग नहीं जाना आर भगं जावो तो नलनी पर सतं चेठना | सलनी एक ऐसा डंडा था कोई गोल 'चूड़ी सी होती है. कि जिस पर बैठकर सुवा उलट जाता है। बह उलटनेपर नलनीको नहीं छोड़ता है। क्यों किछोड़ दे तो उसे ढर लगता है कि कह्टी मैं गिर न जाऊँ। सी शिकारी छातां है भौर यंड़े झारामसे उसे पकड़े लेता हैं। खूब सीखा सुधाने,_ देखो नली पर चेठना नहीं; और नलनी पर बैठना तो दोनींकि चुगने की कोशिश म करना । दने चुगने का यत्त भी करना तो उलट न जाना श्चौर एलट भी जाना तो तुरन्त दोष देना । रोज पाठ किया, पेज थांद फिथा । एक दिन पिजड़ा उका सुता रद्‌ गय; फट उडकर सुवा भाग गया । स तो णक. अगद ख॑ष अणाके दाने देख । उन दानोको शिकारीने विखेर दिय या । सुदा पढ़ता आता कि त्‌ मग मत॒ जाना, भगा तो नलनी परः मत षेठनाः । पेता जा रेष्ठ है श्नोर ये गया उस चलनी पर । देखो नलनौी पर भठना तो दानि चुगने की कोशिश मत करना; दाने ुगता जा रहा दै भोर थद्द कदता जा रहा है । घद्द सहज दी उस नलनी पर लटक शंया ओर बोलता जा रही दे, कि शगर दाने चुगने दौ कोशिश भौ करना तो उलट मत जाना श्र लटफ भी जाना तो पकड़े सत रइना । खुर्म याद कर रहा रै श्रः उस नलनीमे ही वद्‌ लटका हुआ है; उसे इ दीं ! पेखा गोरने घाला तोता शिकारी को प्थादह प्यारा लगा सौर भारास से उसे पकड चा। एक फोर किसान सुच हुक्फा तम्बाद् पीने शाला पुरुष था तो हस्का पीतेमे झपने बच्चेफो णा देता था । देखो वेटा१ हुक्कमें बड़े दुगु दै, इससे बीमारी होती हैं 'र श्रपना_ शुड़-गुड़ करके पीता जा रहा ह। यद _फ्ता जाता है छि देखो वेटा } इससे व्ययंका खच भी होता है श्रौर समय भी घरवीद दोता है । रोज सिखाया शोर उसे पदका करा दिया । घट पुरुप तो पजर गवा । छे खमघ चाद बह लद्का खव हक्का पीवे । एक सेजर्नने समसाया कि तुम्दारे बाप तो ह्हें खूब शिक्षा दिया फरते थे कि ुक्छाम पीसा; दस पद घिर एं । चोला। यदद तो हुक्का पीनिफी विधि है कि




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