हिमकिरीटिनी | Himakiritini

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मयुहार पाच यौवन-मद-कर सखि, जाग री । श्राया है सेंदिस जीवन का, लाया है स्वर श्यामल घन का, उड़ चल सजनि । प्ख तेरे ह्ये राय और. अनुराग री / लगा. वासनाओं का मेला री, तूने सौमाग्य ढकेला, फिसलन पर, कह तो च्रलबेली, कैसे जागे भाग री? उड़ने ,में मत रख कुछ बाकी मधु को एक- कहं का साकी? छोड भमेले, चल एकाकी, रूठ न. जाय सुहाग री /




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