समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम का एक आलोचनात्मक अध्ययन | Samanvit Grameen Vikas Karyakram Ka Ek Alochanatmak Adhyayan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पस्तावलनावर्तमान में विश्व के सामने दो प्रमुख आर्थिक समस्‍यायें हैं - पहली समस्या एशिया के अविकिसित देशों एवं अफीकी देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में फैली गरीबी तथा दूसरी समस्या विकासशील देशों के विकास की गति को बनाये रखने की है जो तीव्र औद्यौगिकीकरण के कारण ही अपेक्षित छोड़ दिया गया है। एक समस्या का निराकरण ही दूसरे का समाधान है। यहसम्भव भी है नहीं भी |गरीबी की समस्या के निराकरण हेतु उन क्षेत्रों में सीधे ध्यान देने की अवश्यकता है जहां ये विद्यमान हैं। इसका समाधान अत्यधिक औधौगिकी करण से नहीं किया जा सकता अपितु इसका समाधान कृषि के विकास से, उत्पादन की कार्यप्रणाली के विस्तार से तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने में निहित है । यह विचार अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत किये गये जिसमें आग्रह किया गया कि वित्तीय संस्थाय अपनी ऋण तथा सहायता नीतियों को पूर्नपरिवर्तित करके विकास शील देशों को `उन क्षेत्रो हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करं जिनकी योजनाय कृषि तथा ` ।ग्रामीण विकास से सम्बन्धित हों क्योकि ग्रामीण गरीबी की समस्या एक १५गम्भीर समस्या हे। |




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