राज सिंह | Raj Singh

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
234
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)राजसिंद ९७
तब जुढ़िया ने विशेष रज्ञ चढा कर चित्र के कुदले जाने का सारा दाल
कट् सुनाया |
[1
पाँचवाँ परिच्छेद
दरिया बीवी
बढ़िया के लड़के का नाम था शेख खिज़ । वह चिन्रकार था । उसकी
दिल्ली में दुकान थी । मां के पास दो दिन रद्द कर वद्द दिल्ली चला गया ।
दिहली में उसी बीवी थी । चद्द दुकान में ही रहती थी । बीवी का नाम था
फातिमा । ख््र ने श्रपनी माँ से रूपनगर वा जो दाल सुना था, वह सब
फादिमा से कद्द दिया । उव वातं वेताने के वाद् खिन्न ने फातिमा से कहा--
प्तुम् श्रमी दरिया वीवीके पाखउजाध्रो | इसस्माचारको वेगम सादबाके
यहाँ वेचने को कददना--शायद कु मिल जाय |?”
दरिया बीवी पास के दी मदान में रददती है । मकान के पिछुवाड़े से
जाने की राद्द है । इसलिये फातिमा बीवी बिना पर्दे के दी दरिया बीवी के
घर ला पहुँची ।
खिज् या फातिमा का विद्नैप परिचयदेनेकी जरूरत नदीं पड़ी; किन्तु
दरिया बौवी का दिशेष परिचय चाहिए, ही । द्रिया वीवी शा श्रचल नाम
द्रीदुचिरा या ऐसी दी दुछ दै। दिन्दु इठ नाम से कोई “उन्हें दुलाता न
या-लोग दरिया वीवी दी ष्हते थे । उसके माँ-बाप नहीं थे, केवल बडी
द्न श्रौर एक चूटी पूफी या खाला, ऐसा ही दुछ थी । मकान में कोई मर्द
नहीं या। दरिया बीवी की उम्र रुघह वर्ष से श्रघिक नद्दीं--उसपर छुछ नाटी
थी, पन्द्रद व्यं से श्रध नष्ट लान पठती थी 1 द्रिया वीवी वहूत सुन्दरी थी,
खिले हुए. फूल जैसी, खदा खिली हई ।
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