हम विषपायी जनम के | Ham Vishapaee Janam Ke
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutBalkrishn Sharma
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
36 MB
कुल पष्ठ :
664
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)११. स्मरण-विहुंगम 4 ५६११२. ज्वाल-पौन-हूाहाकार व ५६३
१३. द्विधा खोप ध ५६८
१४. यात्रा पथे ४ ५६५
१५. तुम मेरी आंखों की पुतलो (नि ५६६
१९. रोको, हे, रोको ५ ५६९
१७. आकांक्षा का राव णि ५७०
१८. अंगारों की झड़ियाँ प ५.७१
१९. विस्मरण-खे प ५७२
२०, ओ हिरनी की आँखों वाली 0 ५७३२१. कितनी दुर पधारे हो ॥ ५७५
२२. वे क्षण क ५७६
२३. हम परित्याग के आदी हैं नर ५७७
२४, लो यह नाता टूट रहा है ^ ५७८
२५. प्रिय, मैं आज भरी झारी-सी के ५८०२६. तुम हसते से प्राण 4; ५८२२७. कौन-सा यह् राग जागा? ॥ ५८३२८. आराइयाँ को ५८४
२९. मृत्तिका की गुड़ियों के गीत भनौ ५८५
३०. कवि जी | ष ५८७१. दुई का सोच + ५९०३२. मेरे अम्बर में निपट अँधेरा छाया ध् ५९२३३. अब यह् रोना-धोना क्या 2 1 ५९४
३४, फिर आ गयी दीवाली कै पु२३५. गागर मे सागर व दु
३६. कागज को नाव षः ५९७
३७. मेँ निज मार वहन कर लंगा ४ ५९८
२८. विनय क ५९८
३९. गभीर मेदकाभरम + ६००
४०. बहुरगी की ६०१
४१. प्यार बना मेरा अभिनाप | ६०२
४२. तुम हो मये पराये ; ९०३हम विषपायी जनम के १७
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