आचार्य राजशेखर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व | Acharya Rajshekher Ka Vyaktitv Evm Krititv

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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191] (4) उनके पुत्र देवपाल ^ © 9481इस प्रकार विभिन शिलालेखो के आधार पर महेन्द्रपाल का समय 890 ई० से 910 ई० तकरस्थिर किया गया है।अन्तः साक्ष्य भी आचार्य राजशेखर को गुर्जरप्रतिहारवशी महेन्द्रपल का गुरू सिद्ध करते हे ।चार्य राजशेखर ने सबसे पहले 900 ई० के भास पास ' कर्पूरमज्जरी' सटक कौ रचना कौ । इसको प्रस्तावना मे उन्होने स्वय को महेन्द्रपल अथवा निर्भयराज का गुरू बताया है 2 कर्पूरमज्जरी का चण्डया चन्द्रपाल सम्भवतः महेन््रपाल ही है । कर्पूरमञ्जरी के बाद आचार्य राजशेखर ने ' बालरामायण ' कौरचना कौ ओौर तत्पश्चात्‌ ' बालभारत' की । इन नाटको के नाम का ' बाल' शब्द इनको कवि केकाव्यरचना काल कौ प्रारम्भिक रचना नही सिद्ध करता क्योकि ' बालरामायण ' मे राजशेखर ने अपनेलिए ' कविवृषा ' शब्द का प्रयोग किया है 8 ' बालरामायण' नामक नाटक रघुकुलतिलक महेन्द्रपालदेवकी सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। इस नाटक मे महेन्द्रपाल की सुस्थिर राज्यलक्ष्मी का वर्णन2. 3९७ाप0ा1'5 इपाधा॥0 घ ग 116 1217165 ग {6 छिपा $0४6७1610ा15 0 8100 8४8 0 ॥९2119/8160018 01 ॥<8111180॥| 25 18561160 {0 ॥$ 9४ {16 51#/800111 11561006 {096&0४& #/11) 81 (10४71 प865, 8४ ५966 06 1606266 9 106 16204&€115 601४/6116166 1101 20101801108 1161608, 171,1--610& ^ 0 862, 876 200 8822--118061080218 01 41110118 चिका लाता8 0 14 2/11510818 ^ 0 903 210 907, 2401 1 1116 0081 0 वे] ग3--1115 501) (६5110818 01 ॥/ 2101088 01 ।शका10 20218 ^ 0 917, रिघ्ाणा ग १2316161 4-1-15 50) 06५20212 ^ 0 9482506/6121.5 1<21011781|8॥1' 73|51161९/21.5 ॥© 7?29€ - 177 (ऽ (000४, © प| 2111181)) * बालकई कड्राओ णिव्भअराअस्स तह उवज्ज्ञाओ' ' (कर्पुरमञ्जरी ~ 1-9)' निखिलेऽस्मिन्‌ कविवृषा ! (*बालरामायण प्रथम अङ्क --श्लोक - 11)




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