पुन्य जीवन ज्योति | Punya Jivan Jyoti

Punya Jivan Jyoti by श्रीमती सज्जन श्री जी - Srimati Sajjan Sri Ji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ५ ) पक्त में विचार रखती रहती हैं । आपका विचार है कि सानव का विकास उसके चरित्र पर आधारित है । इसके साथ ही साथ अपने यह भी कहा कि मनुष्य को ऐसे कार्ये नहीं करने चाहिए जो स्वयं की उन्नति तथा राष्ट्र के विकास मे बाधक हो । देश के उत्थान के विप्रय में आपके विचार बड़े ही सरस तथा सुन्दर हुः । आपने कटा कि “प्रत्येक सनुष्य को सन्तोष के सिद्धान्त का पूर्णतया पालन करना चाहिए । अगर मनुष्य अपनी इच्छाए बढ़ाता रहा और साधन इच्छाओं की गति के अनुसार नहीं वहे. तो मानवीय विकास एक दुलेभ कार्य होगा । इन्हीं उद्गारों के साथ आप सानव समाज को विकास के पथ की ओर अग्रसर करने में लगी हुई हैं । वि सज्ननध्री जी स. के विषयमे जितना लिखा जाय उतना ही कम है 1 उनके वारे मे कलं मी लिखने मे; में तो अत्यन्त असमर्थ हू, जो कुछ बन पड़ा है, वह उनके चरणों में सर्माधित है। यही कामना है कि वे दीर्घायु हों और हम सबका कल्याण करती रहे । नेट दाना




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