भारतीय शासन - व्यवस्था | Bhartiya Shashan Viyavastha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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4 भारतीय शासन-व्यवस्था एवं राजनीति ब्रिटिश संसदीय प्रतिनिधि-मण्ड (1151 एप्त 1261८8800 ) केन्द्रीय विधानसभा कै लिए चुनाव नवम्बर-दिसम्बर 1945 मे हुए । ग्यारह प्रान्तीय विधान सभाश्रों के चुनाव 19 जनवरी, 1946 को असम से शुरू हो कर साढ़े तीन महीने तक चलते रहे । इसी अवधि में 6 जनवरी से 8 फरवरी तक एक ब्रिटिश संसदीय प्रतिनिधि-मंडल ने भारत का दौरा किया । अपने भारत-प्रवास के अन्तिम दिन इस प्रतिनिधि-मं डल के नेता प्रोफेस र रावर्ट रिचर्ड्स (लेवर पार्टी ) ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रत्तिनिघि-मंडल के सभी सदस्य यह तथ्य स्वीकार करते हैं कि भारत के सभी राजनीतिक दल स्वतन्त्रता की माँग करते हैं और इस प्रइन पर उनमें कोई मतभेद नहीं है । उन्होंने यह भी कहा, “आप लोगों में परस्पर मतभेद हैं किन्तु जव आप स्व-शासन (51०७7८0१) की माँग करते हैं, जोकि उचित भी है, तव वे मतभेद गायव हो जाते है---हम सव इस तथ्य को समभते हैं कि अन्तत: भारत में: राजनीतिक विचारों की परिपक्वता आ गई है।”' ब्रिटिश मंत्रिमण्डलीय शिष्टमण्डल--भारत के भविष्य की योजनाएं (छण 1151 (वणल 141551071-- ए 07 {116 एप076€ 2 [171012) संसदीय प्रतिनिधि-मण्डल के वापस लंदन पहुंचने के कुछ ही दिन बाद. (19. फरवरी को) प्रधानमंत्री एटली ने ब्रिटिश लोकसभा (प००5€ ० (०071008) में घोषणा की कि लाडं पथिक लारेन्स, स्टेफोडं क्रिप्स, श्रौर ए० वी ० अलेक्जेण्डर का एक मंत्रिमण्डलीय शिष्टमण्डल भारत जायेगा । इसिष्टमण्डलके दौरे का उद्‌ श्य भारतीय नेताओं के साथ भारत दारा प्राप्त स्व-शासन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली समस्याभों के सम्बन्धः में विचार-विमर्श करना बताया गया । उन्होंने कहा कि दिष्टमण्डल “इस संवैधानिक प्रन से सम्बन्धित सिद्धान्तो ओर का्यंविधि” के बारे मे किसी निणेय पर पहुंचने का प्रयास करेगा । 15 माचंको एटलीने कहा किये तीनों मंत्री भारत को यथासम्भव, शीघ्र एवं पुणे स्वतन्त्रता प्राप्त करने ने अधिकतम सहायता देने का प्रयत्न करेगे । उन्होंने यह भी कहा कि यह्‌ निश्चय करना तो भारत का ही काम है कि वर्तमान के स्थान पर वहाँ किस प्रकार की सरकार स्थापित की जाये, पर ब्रिटिश सरकार की यह इच्छा है कि इसका निणंय करने के लिए आवश्यक तंत्र तुरन्त स्थापित करने में भारत की सहायता की जये । मंत्रिमण्डलीय शिष्टमण्डल 23 मार्च, 1946 को भारत पहुँचा और उसने यहाँ के राजनीतिक नेताओं से वार्त्ताएँ आरम्भ की । इन वार्त्ताओं का अन्तिम दौर 5 से 12 मई तक शिमला में हुआ जिसका कोई परिणाम नहीं निकल सका । दिष्टमण्डल के सदस्यों ने यहू अनुभव किया कि कांग्रेस भारत को यद्यपि संगठित रखना चाहती है, मुस्लिम लीग -पाकिस्तान की माँग पर अड़ी हुई है । शिष्टमण्डल के दोनों पक्षों की माँगें अस्वी- कार करते हुए भारत के भंविष्य के बारे में अपनी ही योजना तैयार की और ब्रिटिश सरकार ने उसे 16 मई को एक श्वेतपत्र (४1112 78) के रूपमेँ प्रकारित कर दिया 1




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