जीवन चरित्र | Jeewan Charitra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जोवन-चरित्र है ।\म९९-हुजूर महाराज साहिब वउमर लड़कपन एक` मतेः तेराको के मेरे में दुरियाये जमना में करिश्ती पर सवार थे जब किश्ती घार में पहुंची जहाँ बल्लियाँ पानी था यक्कायक जमना में फिसल गये उस वक्त बड़ी भारी रोशनी और नूर पानी के अंदर हुज़र महा- राज साहिब का मालूम हुआ और काइ तकलीफ नहीं पहुंची, लाला कन्हैया लाल साहिब खानदानी बड़े भाई आपके जेः हमराह थे फ़ौरन्‌ दरिया में कूद पढ़े उस वक्त पानी मेज से कमर तक हा गया ताकि लाला कन्हैया लाल साहिब मैीसूफ के जे! निहायत फ़िकर में थे खदमः न पहुंचे और वह हुजूर महाराज साहिबका बञासानी बाहर निकाल रावं चुर्नाँचि वह निकाल लाये ।श२-चेंकि हस्ब तरीक़: खानदानी यह दस्तूर था किशादी से पहिले गरुदिक्षा बिहारीजी वाले. गुसाँइजी से दिलाई जाती थी लिहाज़ा उसी मुताबिक हुज़रमहाराज साहिव से भी कहा गया कि गुरुदिक्षा ठव हजर महाराज स्ाहिव ने अपने खनदूनी गुराह जी से उस वक्त चद्‌ दुकीक* सवाल मजृहवी व मुतअल्लिकमेद्‌ शब्द्‌ के किये जिनके जवाब न पाने पर. गुरुदिक्षालेने से इनकार किया मगर मजबूर कराये जाने झर . गहरे । ४£




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