वक्तृत्व कला के बीज 7 | Vakttrva Kala Ke Beej [ Vol - 7 ]
![वक्तृत्व कला के बीज 7 - Vakttrva Kala Ke Beej [ Vol - 7 ] Book Image : वक्तृत्व कला के बीज 7 - Vakttrva Kala Ke Beej [ Vol - 7 ]](https://epustakalay.com/wp-content/uploads/2019/05/vakttrva-kala-ke-beej-vol-7-by-bhairudanji-vaid-motilal-parakh-195x300.jpg)
[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutBhairudanji Vaid
Add Infomation AboutMotilal Parakh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
300
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
भैरूदान जी वैद - Bhairudanji Vaid
No Information available about भैरूदान जी वैद - Bhairudanji Vaid
मोतीलाल पारख - Motilal Parakh
No Information available about मोतीलाल पारख - Motilal Parakh
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नि हि
सर्द प्रथम वि० इ- रस रे दो डए रे इयर हे से आस
है ॥शुरू किया | फिर परी, टू वते अर श डे :
उत्वाही युवे ठ गव्ये रे र दण प्गग्देणयोग्य दनाया।मुन्त हट षार प्ट सरश, सन्नेषु मनम के
जपने वुद्धि वेदन ङ से हरेवि° ०२०५ नुन्न)
मङ्गलवार, समान्घ, =>)-यनमुनि 4 प्रपम् ४पृष्ठ ११६ से १६५महत्व, ४ शरीर की
उपमाए, ७ शरीर का
स्वास्थ्य-आरोग्य, ११
१४ रोगी की सेदा,, १४ पथ्य, २० वैद्य,
भ्य, २४ चिकित्सा,
त्म-सम्बन्धी यनोवी-
३० सोलह्-मस्कार,
बालकों के निर्माण
नको को विगाडने
३७ वालको की६से २५६ तक
“ वृद्ध, ५ वृद्धो
न, & जीवन
। है रे श्रे प्ठ-
६ कर्तिपय
त़ा,२० मृत्यु
समय भी
User Reviews
No Reviews | Add Yours...