रेगिस्तान | Registan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
72
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)उसने शिदगी बरवाद कर दी ? राष्ट्रभाया प्रचार के लिए ? हिदी
वे प्रचार और प्रसार के लिए ? पर हुआ वया ? **' सोचा सो यही
था कि आजादी मिलने में पहले ही देश में अपनी भाषाएं था
जाएं'*'अपनी भाषाएं--मराठी, गुजराती, मलयालम, तमिल,
तेलुगु, बंगला, असमिया, पं जावी, उदिया, कइ्मीरो उोगरी, वस्तड
ताकि देश मूंगा न रह जाए और सब भाषाओं को जोड़ने के
लिए हिंदी था जाएं “पूरे देव को अपनी आवाज़ बिल जाए'**
यही तो गाधी जी ने गोचा था 1लेविंन हुआ वया ? बाज़ादी के नने वरमो याद जव कालीकटे,
कोचीन, घगलौर, मद्रास से लौटा भी तो कया मिला ? इतने बरस
एके जगह मे दरूमरी जगह मागता रहा `` दधिण मारन में, एक कोने
सेद्रूगरे कोने तक देय कौ अपनौ भाषाएं देनी हैं” देश को हिंदी
देनी है गन तीस में निकला था स्वदेशी स्दून की मास्टरी छोड
कर--हिंदी प्रचार के लिए ! थीर सब लौटा तौ देषा, जहां हिद
थी पहले, वहां भी हिंदी नहीं रही है. कहा हैं अपनी भाषाएं
कहां है हिंदी ? लोग बैगे ही गूगे बैठे है * उसी तरह पड़े हुए हैं **सामने नज़र गई तो देखा --उसके किरमिच के जूते धूप में
सूख कर अकड़ गए हैं । टेढे-वेडे हो गए हैं । उसे याद भी नही आया
कि उसने जूते कब उतार दिए थे । तभी लू का एक बगूला दूर से
दौड्ताजाया भौर शीदाभ की सीप जंसी सूती पर्तिया चकरानी-
दौडृती उडती चली गदं -कु वही टट गदं । अकुए के रेयमी फूल
यमृत में उड़ते चले गए । वह दूर तक दौड़ते जाते धूल के बगूले को
देखता रहा । फिर कहीं एक और वगूला उठा'”'फिर एक और
उस निंचाट सूने मंदान में **तभी एक चील चीसी । जैसे उसने किलकारी भरी हो*' फिर
कुछ धाणों तक चील की यावाज टूट-टूट कर आई धी-न'
ना *'इ'ई'*'जर सामोंगी छा गई थी । स्नन्नाटा ओर वड गया
था । पर उसके कान मेअ-- आा-- दई गूर ग्याया।
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