विद्यापति की काव्य - साधना | Vidyapati Ke Kavy - Shadna
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutDeshraj Singh Bhati
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
233
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about देशराजसिंह भाटी - Deshraj Singh Bhati
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श दः =
वच्विच्य्याप्य ल्ति स्का सजगचकद्र सकते सेेस्कलता. च्कन्प्यन्तषए सके स्उज्लुस्त प्कस्तो तत स्वह्ाल्ट रूत्यो पय कु स्वो ते स्का स्वत रूपया्तव्च्व स व्ड-न्प्न्त ल्दासता च्कस्तिप्यथ्श जतन्कोन्तिस्कर -स्वत्क ददे न्क चकर सन्त्व च्यु स्पण्द स्लो स्वऊ्य नस न्व
वपन्ते, प्कच्घन्स्त इनक च्ोन्ा च्या चदश्च्व (१ =च््दनन्क सस्र्व्वन्तच्ये द्भ ४न्क यदुग-्छष्ट द्दात ष्ठु सनि श्वस्ते
यगा स्ते श्वस्वाव्विन्त स्ट ददै ¢ यपे यग चको प्ठरस्य्यत्तिय्यय स्ति त्वन्न चद् चच्सा निरिनन्त
स्यच्देच्ढ ज्ञि अच्यन्त व्रात्ये कन्ति व््वद्डा स्वर्गार-चस्वद्डःरये चतवच्यरः सकें च्कष्न्डो ज्ञ अच्यत च्देग्य-व्छन व्यत
चकद्र द्य म्न व्काच्यय सकी स्तिरः स्वरो व्क स्ग्च्क्त्तो । श्वस्वच्ट च्करष्र्य्य च्छ ¶त्नष्म् य्टग्य ख नारू
स्व स्वन्न- च्वाचद- रदस्य अन्नजा ष्दष सो खत क्पस्त च्वदष्टेष्चद्च्वन ष्ठ जस्त सवण्ण्ट्ख्यः -नल्वसतर- ममास्य
सके स्डषचट्य्यम्न ज्व च्नोव्वन््र चतम स्दर्निञ्र्रि कि (ग्य श्त र्न्दे च्वौ र्वष वतर च्व्वत्ननदखितच्त चव च्-रस्मा,.
प्व्िन्ति च्डस् सयस्यास्यी ला य्ण्य च्योच्वन्व न्व्डते दै, क प्फ चवन्त्तत्तिरह्िन्त च्यााच्ध्च्वत्त स्वत पवन द ऊनये चता श्वच्त्ा-
चन्त ददै 9“ स्क््ल्त्त श्यन््स्ेवकः सबद नःर्च्च न्क स्काससय -्यर्यल्ते यतुचद व्क उगतिन्=्च्छायरा च्ुयोत्छय छक ॥ डच्च
स्ूण स्क स्वि स्वदि च्छद ्नस्स्यय्जन्न कििप्ट च्व्विन्दषए न्त स्तो स्व न्करत्वि चकर च्च्य न्य द्धो सर्द
स्वल्न्य्याच्छन्ब सो स्वस्कप्सा सटे नतर न्ना व्कररव््ि क्के व्रति स्व स्वुईच्वन्द न्ख्यारफ् ददी च्््यिा च्नषए स्वकःत्छ च ॥
शत दि स्िस्थ लिया ो सके स्टॉस्ट्टिसटोणा सतत ह्कस्ो चदे स्यूसा व्क स्तोन्त च्चा स्त रव्छ्सन्नद ञ्छ स्पकत्दय सटे
पद जल ने मे वस्ति का पा ई पे ईकिय न्लिस्ययक, जया न्य्च्कर प्यार सस्ि्य ल्तियय चनधिर सता
जब जय न पे ल्वि कद पद लच्टि व सिस्य्य ल्तरिस्जियच्यक स्वशसिल्टिस््य ल्तिरसा ॥
ता स्तर्न जि लाच्क स्टू्टिटस्क पेण सस्ते वव्विस्पय्प्स्ति कक यगा ऋन्ट्य्यन्न्त
च््यर्नत-च्खरर्प्तत्ता अररः व्वविख्तच्व्यस्तय व्क -दग्ढड ध्या ॥ अस्त स्तस्य त्तव्क प्उच्चन ज्वाभल्त ज ड्व स्यन्ते
च्च कप श्पिष्दटस्य च्छु सद्य्वा स्व 1 त ञ्व्व्य्य्च्छाा-न्द्रेख्या ग््णोदच्च-र सके चपस्तस्व्दपइन्द छन्न छत्य्यग सकच् ब्दो ग्मः
च्य, टस्य स्तम्नुच्चे उयद्देचय के का राज्लस्कस्ता च्व स्नन्वरच्ड च्तद्डन्द स्केल लाई च्वि £ स्युन्दल्नम्ययस्र छान स्तिसरन
स्दव्य ख्तप्यनते स्तास्तना ऋतो न्तो दुच्छ व्क रन्ता च्कद्टत्ते च्य 9 वच्य च्न्तन्तषट नरम च्फ़ज्तस्त पे स्तिव्का चण्डो न्ट यस्य
च्योन्दश ्दुरर्ख्य्ोष्स्ि नवद त्त च्कर ग्न्त च्छे चदन न्ट्व् च्छो न्द्ध. नय्यतन्च्यमेन्द अनयैव ॥ व्मन्त्तए न्य च्वष्स्तर च्व
-ह इ र ष्क ष्ता न काट हस कन वद श्न रद द श 1; क अजया
जज न था जे याज इवव अऊ है जे. जाग हा बज स्व कट वरकि बज बट
मा + २, 1 ~ 1 1 क + 1 मी हमार है जन सा
0 ~ - + कि +
>~ --~ == ऊं. = वरेत्षटः कद कष् 1 एः ह वीटा न्ट त व्क 3 दह ० ¬ ~
ह क ह = ह ० । ¬+ स्ट अता जा हज कुल न बाज के इज इज जा का बी ..... ऋकराइटा दान स्क र्ग ष
2 1 ~टेर क्व क = ८231 अष्टदल बज दा
लाए 7 द्य का नकल कर्ज जे बिग इक ॥ ना ~+, ति जा
User Reviews
No Reviews | Add Yours...