स्वामी रामतीर्थ भाग तेइसवां | swami ramteerth part 23

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
168
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रार्थना, १६तमन्ना है किं चरणो का रहे ध्यान! .,
दमे आरसीर दधँ जव मेरे प्राण ॥
. वदी हो जल-समाधी का नज़ारा ।
तगौ मे द्यो गङ्गा जल की धारा
पदम आसन हो फ़रशे-सतहये-छाव ।
चवर भलती हो हर एक मौज गिरदाव ॥
धरै भेम की छाई हुई हो।
हृवा में लहरें बल खाई हुई हों ॥
हमारा राम, प्यारा ज़िन्दा जावेद ।
शर्या वदेरे-शपक्त - में मिस्ले-खुरशेद ॥
हो जल धायस में यो आसन जसाये 1
सुनी पवेत. ये धुली रमधे ॥
फ़लक तक गूजती हो श्रोरेम् की धुन।
जो शुन खुन खुन के लर जल की हो सुन ॥
ल्वे-भगा गिरोदे-छाशिकों दो)
जव कुछ दिलस्वा प्यारा सर्मो दो ॥
हरः पकः बेखुद हो मस्ताना अदा में ।
छरीली ओश्म की दिलकश सदा में ॥
तसब्बुर दो .चही एक चश्मो-सर में ।
हो फिरती -मोहिनी मूर्त नज़र में ॥
कफ़न तन का बने हर द्वार की घूल । *
चढ़ें बस राम गंगा में मेरे फूल ॥
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