संस्कृत के महाकवि और काव्य | Sanskrit Ke Mahakavi Or Kavya

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
18 MB
कुल पष्ठ :
458
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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प्रातमेभ्याहमुगयाशैलतुंवनसागयः
सम्भोगविप्रलस्भौ च मुनिस्वग पुराध्वरा! ॥
रणुप्रयाणी पयममन्त्रपुत्रो द्याद्यः ।
ब्णनीया यथायोगं सांगोपाज्धा अमी इह ॥
कवेबू त्तस्य बा नाम्ना नायकस्येतरस्य वा ।
नामास्य सर्गोपदेयकथया सर्गनाम तु ॥
इस परिभाषा के अनुसार सगंबन्ध कोटि की रचना का नाम सहाकाव्य है।
इसका नायक देवता या. धीरोदात्त, गणी और उन्वकुलोत्पत्न होता है । एक वंश के
असेक अभिजात राजा भी नायक होते हैं । महाकाव्य में श्वज्ञार, वीर और शास्त में
से कोई एक रस अंगी (प्रधान) होता है) अन्य रस अप्रधान (गौण) होते हैं । कथा-
वस्तु में नादक के समान सच्धियाँ रहती हैं। महाकाव्य की कथा इतिहास-प्रसिद्ध
होती है भयवा किसी महापुरुष के सम्बन्ध में होती है । धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में
से एक ही उसका फल होता है। महाकाब्य नमस्कार, भाशीर्वाद या कथावस्तु के
सिर्देश से अरम्भ होता है) कही-कहीं दृष्टो की निन्दा ओौर सज्जनो का गुमान
होता है। इसमें न तो बहुत छोटे और न बहुत बड़े भाठ से अधिक सगं होते हैं।
प्रत्येक सर्ग में एक ही छ्द होता है, किस्तु सर्ग के कुछ भस्तिम दलोक भित्र छः दों
में दिये जाते हैं। कहीं-कहीं सगे में अनेक छत्द भी मिलते हैं । सग॑ के अन्त में
अगली कथा की सूचना रहती है । इसमें सन्ध्या, सुर्य, चस्दर, रात्रि, प्रदोष, अन्धकार,
दिन, प्रातःकाल, मघ्याह, मृगया, पवंत, चतु, वनः समुद्रः संभोग, वियोग मुनि,
स्वग, नगर, यज्ञ, संग्राम, यात्रा, विवाह, मंत, पूत्र-जन्म भौर अभ्युदय आदि का यथाः
सम्भव सांगोपांग वर्णन होना चाहिए ) महाकाव्य का नम साधास्णतः उसके लेखक,
कथा या नायक आदि के नाम पर रखा जाता है) सगं के नाम वणित कथा के नाम
पर रखे जाते हैं ।
महाकाव्य के लक्षणों का विधान प्रायः प्रत्येक शास्त्रकार नें अपने समय कै
प्रसिद्ध महाकाव्यो के आधार पर ही किया हैं । इस प्रकार भामह भौर दण्डी में अपने
परववर्ती बाहमीकि, अद्वधीष, कालिदास भौर भारवि के महाकाव्यों के आधार पर
अपनी परिभाषाओों को स्वरूपित किया है । विश्वनाथ ने इनके अतिरिक्त माघ भौर
श्रीहुषं आदि की कृतियों को लक्ष्य मे रखकर महाकाव्य की अपनी परिभाषा को
संवधित किया हैं । रुद्रठ की परिभाषा कश्मीर के महाकाव्यों को लक्ष्य करके बनाई
गई हैं ।*
त
१, उदाहरण के किए देखिये रल्नाकर क(. हरवि जय अथवा मख का श्रोकण्ठ-
चरित । रुद्रट की परिभाषा इन महाकाव्यों पर ठीक उतरती है ।
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