हिन्दू मुस्लिम हिन्दुस्तानी | Hindu Muslim Hindustani

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
202
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ११ )“हर-हर महादेव” के नारे लगा देने से ही मुसीबत दूर हो जायेगी
वास्तव मे यदि राप सुख ओर शांति पूवक, सुरक्षित चौर
व्यवस्थित दंग से रहना चाहते है, यदि सचसुच आपको श्राजादी
की फिकर है तो इन गुल-गपाड़ो क उपर उठिये और कुछ ठोस
' काम कीजिये |६अभी बिल्क़ल दाल की वात है । सै प्रयागसे काशी लौट
रहा था । काशी मे २१ घण्टे का कपयृ-खाडरः गा हुआ था,
इसलिए यै सीधा रास्ता छोडकर भिजीपुर और मुगलसराय कीं
ओर से रवाना हुआ ताकि व्यथं स्टेशन पर पडे-पड़े रास्ता खुलने
की मुसीबत न फेलनी पड़े । गाड़ी से भीड़ काफी थी; सारी
गाढ़ी से छुल एक छोटा सा डेबढ़े दर्जे का “कम्पाटटेमेरट” था.
इसी में तीसरे दर्जे की भीड़ से वचने वाते अनेक लोगों को
सफर करना था ।खैर, मैं गाड़ी मे झाकर बैठ गया, मै वद्धा संफर मे चातिं
कम करता हूँ, कुछ पढ़ने या लिखने में दी समय घीत जाता है ।
परतु भीड़ इतनी थी, घूप और गर्सी भी इस कदर थी कि पढ़ना-
लिखना दूर था । चुप-चाप मन भार कर बैठ रहा । इतने में
एक हृप्ट-पुप्ट, सुशिनित, वयस्क श्यीर खादी धारी युवक ने प्रवेशं
किया और मेरे सामने बाली पटरी पर आसन जमाया । सफर
की डुरावस्था आर रेलवे को कुव्यवस्था से भट बात सरकारी
User Reviews
No Reviews | Add Yours...