प्राचीन राजस्थानी गीत | Pracheen Rajasthani Geet

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : प्राचीन राजस्थानी गीत  - Pracheen Rajasthani Geet
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about भगवतीलाल भट्ट - Bhagwatilal Bhatt

Add Infomation AboutBhagwatilal Bhatt

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
छल मेगल द अगव मसी,यला मारि खायें । मीति मौज चीकम क्रित) ६ ॥खत स्यामि सुट कह तास मादूल एमार कित्ती ॥ 9व्रस- जिसको दमयः पुयैज कम चन्द सा 1 शतु समूह पर नेमशं्रित देते लगातार वार फरन जद सलग्न हो उसका मदन कर देता दे. लि लस शोर दान चौ ख्याति मो चदुष्ए्‌ दषे परमार शादूल का भ्र यश गान करता हूँदरीपालू मदिपाल रपौ इटाल कमा पंचयण माल करिवै कपाला वे अस तरवारि दुनियां वदित) दं तास सदूल पमार क्ती) = बम शिसझे पूज मान. दी ष्ठं एषम स्छेघ, [0 महिपाल, ययंदेव, कर्मचन्द, पंचायण दोर मार्दव के जति हैँ. ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now