देश भाक्ति की कविताए | Desh Bhakti Ki Kavitayan

Book Image : देश भाक्ति की कविताए  - Desh Bhakti Ki Kavitayan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जया. -न ना अजज :र,) 1 2 े पेख])5%5-जयाबह)अनुक्रमभारत दुदशा ;. झब काल पडा है भारी विवादी बढ़े हू यहा कसे क्से दिन फेर पिता भारते मीत कमवीर मात भूमि वदना भारतभूमि हमारी जग भारत का जय गान क्रो हम स्वदेश के प्राण जम दिया माता सा जिसने हमारा प्यारा भारतवप मातृभूमि गगा माग रही है मस्तक जमना मांग रही है सपने--1 एस्०एपि0/82भारते दु हरिश्चद्र बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'प्रतापनारायण मिश्रनाथूराम शकर शमाश्रीधर पाठवअ्रयोध्यार्सिह उपाध्याय 'हरिमौध' सत्यदेव परिब्राजकमाधव शुक्लगिरिधर शर्मा 'नवरत्न' गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' मसन द्विवेदी “गजपुरी' लॉचनप्रसाद पाण्डेय मधिलीशरण गुप्तमाखनलाल चतुर्वेदी(दाद]10 14 5श्र 19 20 21 2224




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