कबीरवचनामृत | Kabiiravachanamrita

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : कबीरवचनामृत  - Kabiiravachanamrita
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about ओंकारनाथ मिश्र - Onkarnath Mishra

Add Infomation AboutOnkarnath Mishra

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
(ও)कबीर महिदी कर घालिआ, आपु पिसाइ पीसाइ ।ते सह बात न पूली, कबहु न लाई पाई ।। ६५॥कषीर जिह दर आवत जाति अहु, हटके नाही कोह ।सो दर कैसे खोड, जो दरू एेसा होई ॥ ६६ ॥केवीर इवा था पे उबर, गुनकी लहरि भवकि ।जब देखिड बेडा जरजरा, तथ उति परिउ हउ फर्क ॥६७ कबीर पापी भगति न भावई हरि पूजा न सुहाई ।माखी चदनु परहरे, जह बिगंध तह जाइ ॥ ६८ ॥कबीर बेदु मुआ रोमी मया, मूरा सबु संसारु।एकं कवीरा न मृञ्चा, जिह नाही रोवनहार ॥ && ॥ कबीर राम न घिआइओ।, मोटी लागी खोरि |काइआ हांडी काठ की, न उह चरे बहोरि ॥ ৩০ || कबीर ऐसी होइ परी, मनको भावत कीन ।मरने ते किआ डरपना, जब हाथ सधउरा लीन ॥ ७१॥ केवीर रस को गांड चुक्षीएे, गुन कड मरीएे राई । अवगुनाआर मानस, भलो न कहि है कोई ॥ ७२॥ करवीर गागरि जल भरी, आजु कालि जह एूरि ।गुरु जु चेतदहि आपनो, श्रध माली जहिगे लुटि ॥७३॥ कबीर कूकरु राम को, म्ुतीआ मेरो नाउ।गले हमारे जेवरी, जह खिंचे तह जाउ ॥ ७४ ॥कबीर जपनी काठ की, फिआ दिखलावहि लोइ।हिरदे राम्म न चेतही, इह जपन्ी किआ होइ ॥ ७५॥




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now