खाद और उर्वरक | Khad Aur Urvarak

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Khad Aur Urvarak by फूलदेव सहाय वर्मा - Phooldev Sahaya Varma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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खेती के संबन्ध में भारत सरकार की योजनाएं और सहकारी खेती ३ टन अन्न बाहर से आया वहाँ १९५५ में ७ छाख टन ही आया। १९५६ में भारत में १० लाख टन अनाज भंडार में था। १९५८-५९ में २० रासं टन गेहूं ओर ५ लाख टन चावल मंगाने का प्रयत्न हो रहा है जिसका मूल्य ७७ करोड़ रुपया आँका বাঘা ই। अनाज के उत्पादन की वृद्धि से देश की आथिक दशा में स्थिरता आ गयी है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है जिससे उद्योग-धन्धों के सामान बाहर से मँगाने में सुविधा हुई है। कपास के उत्पादन में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है। जूट और चीनी के उत्पादन में यद्यपि सनू १९५२-५३ और १९५३-५४ में कमी हुई पर १९५४-५५ और १९५५-५६ में पर्याप्त वृद्धि हुई है। १९५४-५५ में १५-९ छाख ठन और १९५५- ५६ में १८.७ लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। छोटी-छोटी सिंचाई की योजनाओं से इसमें विशेष सहायता मिली है। पहली पंचवर्षीय योजना मे १०० लाख एकड़ जमीन कौ सिचाई का प्रबन्ध हुआ ओर ६००० नल-कूप खोदे गये । अमोनियम सल्फेट की खपत भी इस वीच प्रायः दुगुनी हो गयी है। जहाँ पहटी पंचवर्षीय योजना के पहले २७५ हजार टन अमोनियम सल्फेट खपता था वहाँ अब ६१० हजार टन की खपत हो गयी है। इस बीच १० लाख एकड़ नयी भूमि की जुताई हुई है। योजना के पूर्व जहाँ २५२० लाख एकड़ भूमि में खेती होती थी वहाँ उसके बाद खेतीवाली भूमि २७१० लाख एकड़ हो गयी है। जापानी विधि से धान की खेती जहाँ १९५२- ५३ में केवल ४ लाख एकड़ में होती थी वहाँ १९५३-५४ में यह १३ लाख एकड़ भूमि मे हो गयी है, फलतः उत्पादन की वृद्धि से अनाज की बिक्री के नियंत्रण की आव- इ्यकता नहीं रही। दूसरी पंचवर्षीय योजना में और उत्पादन बढ़ाने की योजना बनी है। आबादी की वृद्धि और उद्योग-धन्धों के विकास से कृषि उत्पादन की माँग बढ़ गयी है और बढ़ेगी। इस दूसरी योजना में खेती पर ५६५ करोड़ रुपया लगाने का विचार है। इससे--- अनाज उत्पादन में १०० लाख टन कपास उत्पादन में १३ लाख गाँठ तेलहन उत्पादन में १५ लाख टन जूट उत्पादन में १० लाख गाँठ ईख उत्पादन में १३ छाख टन वृद्धि की आशा की जाती है।




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