सत्य सगड़ीत | Satya Sagdhit

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
140
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)तेरा प्यार [५मेने चाहा तेय प्यार
छल करनेमे छल्य गया में बनकर मूखे ममार । मेन ।
समझा था तुन्नका छल्ता हैं
अब समझा में ही जलता हूँ
नुझकी धोखा देना ही था धोख् खाना आप)
जब समझा ठ मन मे बेठा देख रहा सब पाप ॥
मेरा चर हुआ अभिमान
तेरी देग्व पडी मुसकान
नर चरणो पर बरसनि ल्गा अश्र की बार |
मेन चाहा तेरा प्यार ॥ २ ॥मन चाहा तरा प्यार
लेग आशाबाद मिला तब सूझ पडा ससार ॥ मेन ।
जाति पाँति का मोह छोड कर
ऊँच नीच का भेद तोड कर
आया तेरे पास, दिखाया तने अपना ठांट
सर्वधर्म सम- भाव, अहिंसा का सिखलाया पाठ
मैन पाया सल्न-समाज
जिसम था तेरा ही साज
हुआ विश्वमय, विश्ववन्घु मैं तरा ग्विदमतगार
मेन चाहा तग प्यार |০০৫০৯
২০০৫ ২১১
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