बाँकीदास ग्रन्थावली | Bankidas-granthwali
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
22 MB
कुल पष्ठ :
232
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( १३ )हैं। डिंगल भाषा में गीत-रचना ही प्रधान मानी जाती है
और बारहट कवि गीतो का बहुत ही सावधानी, चतुराई, रज
छर शक्ति से भरकर कहते हैं। फिर उनका बोलना
बहुत ही आग उनमें फू क देता है। उनके मुख की 'सरस्वती”
उनके गीतों का सौंगुना रोचक और मज़ेदार बना देती है ।
इसके गीतों ने कायडें का वीर बना दिया, गई बोती लड़ाइयें
का जय प्रदान करा दी, भगोड़ों के दिल्लों में वीर-रस भरकर
युद्ध में लड़ाकर जय दिल्ला दी, रियासतें उल्टी दिल्ला दी और
न जाने कितने ओर गजब? ढा दिए। इसी रंग-ढंग के गीत
बनाने ओर कहनेवाले बॉकीदासजी भी थे। “फुट संग्रह”
के गीत सं० ( १७ ) में बॉकीदासजी ने स्वयं अपनी विद्या,
प्रतिभा और जानकारी को बताया है। इसकी पढ़ना
उथित रहै । .“चौंसठ अवधान( २) बाँकीदासजी के संबंध मं सीतारामजी लालसधपुरवाल्ते लिखते हें :-( के ) “बाँकीदासजी के पिता फतहसिंहजी का विवाह _
वागसी कौ सरव परगना सिवाना, इलाका जेाधपुर, मं हन्ना
था। बांरौदासजी के मामा चार भाई थे। बचपन में
बाँकीदासजी ने कुछ समय तक सरबड़ी गाँव [मरथात् ननिहाल
ही ] में विद्या प्राप्त की थी। एक समय जब वे १३ ही वर्ष
के थे [ संभवत: संबत् १-४१ वि० हा ]तो उनको उनके मासा
ऊकजो बाले गाँव के ठाकुर नाहरसिंहजी के पास ले गए |
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