तीर्थकर वर्द्धमान भाग - 1 | Tirthakar Vardhaman Bhag - 1
श्रेणी : धार्मिक / Religious, पौराणिक / Mythological

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
17 MB
कुल पष्ठ :
520
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भूमिकाबंधुवर श्रोचन्दजी रामपुरियाने जब प्रस्तुत पुस्तकको भूमिका
लिख देनेका आग्रह किया तो अत्यधिक व्यस्त होने और प्रपनी मर्या-
दाओंको जानते हुए भी में सहसा इन्कार न कर सका। इसका मृख्य
कारण था प्रपने भारको हल्का करनेकी भावना । आजसे कुछ महोने
पूर्व जब में श्री रामपुरियाजीसे मिला था तो उन्होंने इस पुस्तककी
चर्चा करते हुए सहज भावसे पुछ लिया था कि भूमिका किससे लिख-
वाना टीक होगा । मने उन्हें न केवल नामही सुया, अपितु
भूमिका लिखवा देनेका भ्राश्वासन भी दे दिया । मेरे इस आदवासन
पर रामपुरियाजी कई महीने तक छपो पुस्तक को केवल भूमिकाके
' लिए रोके रहे । लेकिन वचन देकर भौर चाहते हुए भी जब वह सज्जन
अत्यधिक व्यस्तताके कारण भूमिका न भेज सके और कई महीने
निकल गये तो मेरे हृदय पर बोझ्चकी एक चट्टान-सी खड़ी हो गई।
उसी बोक्षको हल्का करनेके लिए, भूमिकाके रूपमें इन पंक्तियोंके
लिखतेकी मांग होने पर, मेरे लिए बचनेका कोई भ्रवसर न रहा।
मुझे खेद है कि रामपुरियाजीको पुस्तक प्रकाशित करने भोर पाठकोंको
उसे पानेके लिए इतनी प्रतीक्षा करनी पड़ी ।भारत एक विशाल भू-खण्ड हें। लगभग पेंतीस करोड छोग यहां
बसते हें। उनकी अनेक जातियां हें, धर्म हें प्रौर अठग-अलग বিবার
है। प्राचोतकालसे ही यह परम्परा चलो प्रा रही है। जिस प्रमद
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