साम्यवाद का संदेश | Samyavad Ka Sandesh

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Samyavad Ka Sandesh  by श्री सत्यभक्त - Shri Satybhakt

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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२ साम्यवाद का सन्देश साम्यवाद का उद्देश्य यह है कि उन तमाम লী पर, जो कि स्व-साधारण के जीवन के लिए आवश्यक हैं, समाज का अधिकार रहे। इसका 'अथ यह नहीं कि हमारे व्यक्तिगत इस्तेमाल फी चीज़ों पर भी समाज का अधिकार रहेगा। साम्यवाद यह कभी नहीं कहता कि मेरे कपढ़ों, घड़ी, चश्मा, मेख, छुरी, भोजन के बर्तन आदि पर भी समाज का या पथ्चायत का अधिकार हो जायगा। क्योकि एन चीज़ों का इस्तेमाल में व्यक्तिगत रूप से करता हूँ; और इन पर मेया . अधिकार रहने से दूसरे किसी पुरुष यासत्री को तकलीफ़ नहीं होती । पर अगर में किसी ज़मीन के हिस्से को या खान, रेलवे, फारखाने आदि को अपनी सम्पत्ति बतछाऊँ, उन पर अधिकार कायम करूँ तो साम्यवाद उसका विरोध करता है । क्योकि इन चीज़ों का इस्तेमाल में व्यक्तिगत रूप से नहीं कर सकता--सिफ़ अपने शरीर द्वारा मेहनत करके में ज़मीन, खान, रेल या कारखाने से कोई कायं सिद्ध नहीं कर सूता । विना दुसरे बहुत से खोगाँ की स्ायता के न ज़मीन न रेल चलाई जा सकती है, न खान और कारखाने में माल तैयार किया जा सकता है। ये सथ कारवार, व्यापार, खेती आदि आजकल के ज़माने में सब लोगों के सहयोग से ही ङ सकते हैं, और सबको अपनी जीवन-रक्ता के लिए उनकी आवश्यकता है। इसलिए साम्यवाद उन्न पर किसी




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