निर्निमेष | Nirnimesh

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Book Image : निर्निमेष  - Nirnimesh
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मन हुआ वृन्दावन सावित्री परमारदूर वशी बज उठी मन हुआ व-दावन।सलतरछाही-सीभार सदलीउलट गई अधियारी पर्तेंसौप चपईसूरज किरणेबाध गया दिनभर णते पाती धी पुल गई धूप का छूवर चदन ।खेता खलिहानामे छलकामौसम का वासती झरनामधुमासीयाहा म महकासरसा का श्गारित सपना सूरजमुखी क्षणा की यादें रचा गड दरपने।छ এ




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