नवयुग का प्रभात | Navayug Kaa Prabhaat

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Book Image : नवयुग का प्रभात  - Navayug Kaa Prabhaat
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यचनों का निर्वाह १३उस उँगली का ऊपरी सिरा चोन की लाल हथेली में जुदा हो और आगे का सिरा कम्बोदिया और दक्षिणी वियतनाम में घुसा हुआ हो ।राजदूत सूवान्नावोंग ने चीन और बर्मा से लगे हुए उत्तर-परिचमी प्रान्त की ओर शारा किया । पहली बार मेरी नज़र उस नाम पर पड़ी, जो भविष्य में बार-बार मेरे मस्तिष्क में चक्कर काटनेवाला था । वह था एक प्रदेश का नाम - 'नाम-था ! ।उन्होंने कहा-“ उसे आपकी सबसे ज्यादा ज्रूरत होगी; लेकिन आप वहाँ जायें, तो आपको काफी खतरा उठाना पड़ेगा । 'नाम-था” सबसे अलग पढ़ता है । वहाँ के लोग गरीब हैं, रोगों का वर्ह राज है। राजनीतिक परिस्थिति नाजुक है; किसी भी परिचमवासी के लिए उसे समझना बहुत कठिन है। ”मेंने नक्शे को देखा और यह देख कर मुझे आइचये हुआ कि ' नाम-था ' उत्तरी वियतनाम के उस दर्दनाक शहर, देफोंग से पर्चिम, लगभग एक सीध में है । दूरी होगी लगभग पाँच सौ मील। १९५४ के जिनीवा सम्मेलन द्वारा तय की गयी शर्तों के मातहत दोनों पड़ोसी प्रान्त 'पाथेत लाओ” का अस्थायी अड्डा बन गये थे । और “ पाथेत लाओ? का नेतृत्व साम्यवादियों के द्वाथ में था। इसी सम्मेलन ने वियतनाम का विभाजन किया था तथा कम्बोदिया और लाओस को इंडो-चीन में “ तटस्थ ” बनाया था।मैंने कहा कि हम खतरा उठाने को तैयार हैं, परन्तु साथ-ही-साथ सावधानी बरतने का बचन भी दिया | राजदूत सूवान्नावोंग ने बड़े तपाक से हाथ मिलाया और मुझे आश्वासन दिया कि उन्हें मुझ पर पूरा विश्वास है।उन्होंने कहा-“ पहले भी कई बार गोरे लोग हमारी सहायता करने आये हैं ; परन्तु उसके पीछे हमेशा कुछ स्वार्थ छिपा रहता था ~ जेते उपनिवेश क्रायम करना, व्यापार करना, लोगों का धर्म-परिवतैन करना । परन्तु मुझे वास्तव में विश्वास है कि आपका उद्देश्य शुद्ध मानवतावादी है। इसीसे आपका दल मेरे देश में अनूठा रहेगा। ” फिर उनकी आँखों में एक चमक दिखायी दी और वे बोले - “ ह, मेरे कुछ देशवासियों को इस पर विश्वास करने में ज़्रा कठिनाई अवश्य होगी। ”हमारे मिशन को क़ानूनी मान्यता दिलवाने के लिए इंटरनेशनल रेस्‍्क्यु कमेटी ( अन्तर्राष्ट्रीय उद्धार समिति ) के अध्यक्ष, एंजियर बिडल ब्यूक ने हमें अपनी समिति के तत्वावधान मे छेने की ध्यवस्था की । सारे संसार में इस समिति का मान है । मेने एक बार फिर बैंक के भपने खाते पर गौर किया । अपनी पुस्तक ओर माषण-अभियान की कमाई में जमा करता आ रहा था। फिर वियतनाम के अपने




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