ग्रामकोष का वैचारिक आधार | Gramkosh Ka Vaicharik Adhar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
92
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)द्वितीय अध्याय
क्षेत्र परिचयग्रामस्वराज्य भ्रान्दोलन में विहार का प्रमुख स्थान रहा द । विनोवाजी .
ने विहार को श्रान्दोलन का प्रयोग प्रान्त माना है। भू-दान-ग्रामदान श्रान्दोलन
का वँचारिक प्रसार जितनी सफलता से विहार में हुआ उतना श्रन्य प्रान्तों में
नहीं हो पाया है । राजगृह के अखिल भारतीय सर्वोदिय सम्मेलन में, 1969 में
गांधी णतान्दी कै भ्रवसर पर “विहार-दान' सम्पन्न हुआ । इस व्यापक काम के
बाद सघनता की शोर जाना स्वाभाविक था। इसी वीच-1970 में एक ऐसी
घटना घटी जिसके कारण श्री जयभ्रकाश नाराय ने विहार के मुजफ्फरपुर
जिले के भुसहरी प्रखण्ड को श्रपना कार्य क्षेत्र बनाया । इस प्रकार पूरे देश का
ध्यान मुसहरी की ओर गया, साथ ही साथ उसमें लगे लोगों को कार्य की एक
नयी प्रो रणा मिली । इसी वपं स्वं सेवा संघ का श्रविवेणन सेवाग्राम में ग्रा 1
इस श्रधिवेशन कै श्रवसर पर विनोवाजी की प्रेरणा से विहार के लोगों ने
सरहसा जिले को सघन कार्य के लिये चुना । सरहसा का पड़ौसी जिला है
पूणिया । पूर्िया श्री वैद्यनाथ प्रसाद चौधरी की कर्मभूमि है। पृणियाका
रूपौली सरहसा जिले के साय लगा हुआ्रा प्रखण्ड है| श्री वेद्यनाथ प्रसाद चौवरी
ने रूपौलीमें वस्ने का निणंय किया) इस प्रकार विहार में सधन कार्य के
तीन क्षेत्र वने--सरहसा, मुसहरी श्रौर रूपौली । इन तीनो क्षेत्रो के श्रतिरिक्त
मुभेर जिले का काका प्रखण्ड विहार का प्रथम प्रखण्ड है जहां पुष्टिका কাজ
विशेप सधनता से चला है । यहीं सवसे पहले प्रखण्ड सभा वनी । इन बातों
को ध्यान में रखकर सहरसा, मुस्तहरी, रूपौली और फाफा--इन चार क्षेत्रो
को इस श्रध्ययन के लिये चुना गया ।इन क्षेत्रों का सामान्य परिचय इस प्रकार है।
सहरसा--सहरसा विहार का एक नया जिला है। यह उत्तर विहार का सबसे
छोटा जिला भी है। 2 अप्रेल 1954 को भागलपुर जिले से काट कर यह
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