यज्ञोपवीत संस्कार तथा वेदारम्भ संस्कार एक दिन में | Yogpaitsanakar Tatha Vedarambh Ak Din Me

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
136
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ६ )
स्मो य आत्मदा बलदा यस्य विश्व
उपासते प्रशिषं यस्य देवाः । यस्यच्डाया-
ऽभरतं यस्य मृत्युः कस्मे देवाय हविषा
विधेम \३॥ यजु० अ० २५ মণ হই।
खोइम यः पाणतो निमिषतो महित्वेक
दद्राजा जगतो बभ्रूव । य ईशे शरस्य
दि पदश्चतुष्पदः कस्मे दैवाय हविषा
विधेम ॥४॥ यजु° अ० २३ मं० ३।
ओश्सू येन द्योख्या पृथिवों च दूढा
येन स्वः स्तभितं येन नाकः। यो अन्तरिक्षे
रजसो विमानः कस्मे देवाय हविषा विधेम॥९॥
यजु° अ० ३२ मं०६।
स्मोरेम् प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो
विश्वा जातानि परि ता बश्रूव । यत्कामास्ते
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