श्री स्वामी सियारामजी के जीवन चरित्र और उपदेश पूर्ण पत्र | Shreeswami Siyaramji Ke Jivan Charitra Our Updes Purn Patra

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Shreeswami Siyaramji Ke Jivan Charitra Our Updes Purn Patra by सियारामशरण प्रसाद - Siaramsharan Prasad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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न, ६६. श्छे६५. > ६५७, হল৯৪,१००. १०९१. १०२. १०३. १०४. १०२. १०६. १०७. १०८. १०६. ११०. १११. ११२. ११३. -११४ ११९५.( 5 )वैराग्यतेलकरो ..১ = ০৯, पदार-सेवन से प्रेम, संगनदोप -~ „^ शात्र श्रद्धा, वेद का अधिकारी, अभ्यास मेंखलता = == = ० ५ तप श्रौर श्नभ्यास „^ `न ^ दुःख से मुक्ति के उपायः शरीरयात्रा ৯০,असली त्याग मन का त्याग है त मायाकात्यागकठिनिहै `~ ০০০माया-जाल, इच्छाओं की परम्परा, बन्धन का कारण ~ ५ खी-चरित्र का मोह हानिकारक हैशुद्ध हृदय ही अधिकारी है. ...खरी माया रूप है, विवेक और सुखभ्यास ০৬০ রর संसारी खख श्नौर परमाथ का सुख „^ भीतर के सुख और घ्राहर का सुखाभास ....' पूं वैराग्यवान ही गृहस्थ त्याग सकता हैवैराग्य श्रीर अभ्यासभगवान भक्तों के रक्तक और प्ररीक्षक हैं सख्रीउपयोगी उपदेश ৫০ ভা प्राणाभ्यास और ऋतम्भरा, बेराग्य, असात्रधानी सत्री-सात्र साया रूप है हा पी লন্তন্নর্থ ললবী श्चौर प्रमद्‌ রা, এলি व्यवहार .... , न `, ' «० संसार केसे दुःखमय है কাकाम क संस्कारों को जीतना ७७७ ~ १ । ২৯৬५४६ ५२८०५१ ५३ द्‌ ८९८५८ ८५६৬৬৩ ९८९८६ 5০ ५६१ श्द्र श्द्रे द ‰द४ 4) ६६ १८६७ । 4. ৬৬০ ৬৩০ ५७१ ८७२्‌ ওই




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