बापू के पत्र बीबी अमतुस्सलाम के नाम | Bapu Ke Patra Beebee Amatussalam Ke Naam

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Bapu Ke Patra Beebee Amatussalam Ke Naam by काका साहब कालेलकर - Kaka Sahab Kalelkar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१५ अमतुण्बइतके शाम गांबौजौके म॑ पत्र पठृठे गॉबौबीके पितृ शात्सस्‍्यका मौर अमतुरुबह॒भकौ सक्तिका हरएक बाक्यमे मतुमव होता है। दोतोके वौषका हार्शिक प्रेम झसाथारण है। एक पत्रमें माँधौजी लिशते हे जेय चार्ता क्या शीय है? माज मे मिना प्याए कर रहा हु इसका दुस्े पता गही। बितना में ऐेरे लिए कर रहा हूं इतना मने किसौ खड़कौ७ड़े किए महीं किया है। पह की भहरबातौकौ बात तही है। में बूसरा कर ही गहीं छक्ता। हैरा धुस्था सब कोईं महसूस करते हूँ शेकिन तेरी सेभागृत्तिके शापे झंभका सर शूकता है और तेर गुस्सेको बरदाइत कर क्ते हे!” আঁ জা पर बे छिलते ६ पु मूषे बन्धौ कर म तुशे। यह तो मच्छा सौदा हुमा म? जौर एक चपह सिखते है तूने मूभसे दुछ भी तही प्विया है मह सड्टी है और तेरे इतता किसौने तहीं छिपा है यश भी सही है। गाभौजौके पे सारे ख्त्त तिरे प्रेमपत्र हो हे। मूछ्छमान परिवारोके साथ धांजौजीका विदिता गहरा प्रेम- सम्बरष था इसके भौ उदाइरण इन पत्नोर्मे बगह-बगह पाये थातै हे । अफुरूषहतने अब दांशौजौक्रौ মঘল ভুদা হেদুলা माना एष माषीके सद लोपोंहौ लौ জলা মালা । বলল सी माजौ पौत्र काम्तिश्नालके प्रति अमपुसबाइनका मातु-हरप चोरोंसे बद्ठा। और बधः उनका प्रेम बइने लप्ता है तब उसमें बाड़ हो था जाएँ है। कांति इस भदो बरदाष्ठ म शर सङा दृ बबड़ाने खूगा। इसका जिक्र भी इष पर्ने पावा भावा है। जन अमतुखबहन बापूयौशे पारु आईं तब लकी रप्र पौष बर्षकौ थौ। टबते करौ् सौरूह बर् उरहें बापूकौ रहतुमाई मिघ्रौ। सोकं ब्यम खषा जार सौते अधिक कोले-बड़ पत्र रच्छें मिले। छेकित সতী মালা ছু কিছু बापूजीके बानेंढ्रे बाई भी अमपुझंबइतकों डतका कट्भातौ सत्संग मिक्ता हो है। जब बे रिष्छी जातौ हौ तव कमौ-कमी बापूजीकौ समाविके पाप्त हो छारो रात बिताती है!




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