महिला - शासन | Mahilaa Shaasan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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महिला-शासन ३पिटाई पसन्द करे । গল: অই কামলা শী समाप्त हुआ। न बन्दूकों की' जहूरत न कारतूसों की ।बन्दूकों और कारतूसों की बचत के अतिरिक्त प्रकाशन विभाग में भी काफी बचत हो जाने की आशा है । ब्राडकास्टिंग विभाग पर तो ताला ही लटका दिया जायेगा ।यह एक सचाई है कि औरतों के पेट में प्रत्येक बात इसी तरह फुदकती रहती है, जसे पानी में मेडक । बस जो भी कोई नई सरकारी धोषणा हुई वह या तो पोस्टरों पर छपवाकरर जनता तक पहुँचा दी या दो चार कुटनी-किस्म की औरतों को बतला दीं। वह उसे इसी तरह से प्रसारित कर देंगी जेसे आलइंडिया रेडियो कभी-कभी कवि सम्मेलनों के द्वारा बड़े उत्साह के साथ अ्ंटशंट कविताओं को ।हाँ, एक थोड़ीसी दिक्कत है श्लौर वह है छुट्टियों की श्रधिकता की । साथ ही एक लाभ भी है कि यह एक साथ छुट्टी न लेकर अपनी प्राकृतिक आ्रावश्यकता के अनुसार ही लेती रहा करेंगी और काम में परेशानी नहीं ग्रैगी । । रहा प्रश्न श्रृष्टि-निर्माण के समय का, उसके लिये छुट्री के दिनों में ओ्ओवरटाईम से भी काम लिया जा सकता है। बाद में बच्चे की पर- वरिश का भार बाप पर रहेगा ही ।सब नेताओं ने भगवान की इस नई योजना को एक स्वर से सिर हिला कर स्वीकार कर लिया श्रौर उनके स्वीकार करते ही यमदूृतों केदस्ते उन्हे उनके बिस्तरों पर उठा-उठा कर फिर डाल गये। दूसरे दिन सरकार बदल गई | प्राचीन मंत्रियों ने श्रपनी जगह ग्रपनीबीबियों को भेज दिया और उनका ही अनुकरण अन्य सरकारी पदाधि- कारियों तथा कमंचारियों ने किया । जो लोग विधुर थे, उन्होंने भ्रपनी या तो प्रेमिकाओं को भेजा या शादी का सर्टिफिकेट पेश करने के लिये १-१, २-२ मास की अ्रवधि मांग ली। कुछ ब्रह्मचारी ऐसे भी थे,




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