संस्कृत - साहित्य - शास्त्र | Sanskrit - Sahitya - Shastra

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Sanskrit - Sahitya - Shastra by राधेश्याम मिश्र -radheshyam mishr

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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य तषमे सौधे यहम कहकर कः प्रतिना भैम होने पर तुमे धौ मार डातूँगा बड़ करते दै ¦ दर्पणा कौ राण के पास भेजते हुए ये सीता के विक्रय में काते है-- भाया बृद्धों परित्यम्य ँ्यामेजेपभजिष्यति यड़ोडित परम्परा कोई नवीन नहीं है । कोटिल्य के अर्दा पे भ्रौ एस ओर सेः कौ! पीन सतिलोमश्तव' कहां हैं उसतें ख्ट' হুস্বহ आँखों बाला कहना अधना अपना अरव रोता अँ जार गदुसर वै (तति निना लिदृयांचर से सीधे सह न पूछ फर कि आप का जन्य किस कुत में = रामायण, आणा का0 १8/३3 1-13 द्धि अर्धशाजत्र, 3 /ह है /4 3० इच्टह ये, वहीं 5/५5/45




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