राजस्थान इतिहास भाग - 2 | Rajasthan Itihas Bhag - 2

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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९77८7८7८ 70211) 1737 02:3ए:9ए)ए::०ए दपि इस ग्रन्थके प्रथम भागमें भूमिकारूप एक बृहत्‌ छख प्रकाशित कर चके @ हैं, परन्तु इस ग्रन्थके गोरबसे इस दूसरे भागकी भूमिकामें भी कुछ कहना है भारतके ¢ प्राचोन इतिहासकी खोज अभीतक पूरी नहीं हुई हे, इतिहासका अभाव, इतिदहासका $/ अभाव चारोंआरसे यह ध्वनि गूज रही दे पर ईश्वरकी कृपासे इस अभावकी पूर्ति शांघ्र ही होनेवाढी द इतिहाघका सूयं शनेः सनः उपरको उठ रहा हे दूसरे देशवासियोंफे लिखे हुए पक्षपातपूंण इतिहासोंसे हमारे देश तथा धमे कमेका गौरब:कब रह सकता है, , इसीसे विदृशीजरनोंके निर्मेत इतिहास पढ़कर ही हमारे नवयुवक अपने पुरुषाओंकों तुच्छ समझते हुए धमे कमेसे हाथ घो बैठते हैं। समयकी केसी विचित्र माहिमा है छि जिन भारतवासी पुरुषाओंसे हम अपना गोरव समझते थे, आज उन्हींके नाम ओर ४ चरित्रसे हम खीझते हूँ, उनको तुच्छ दृष्टिसे देखते है उनके आचार विचारपर श्रद्धा कव नहीं करते बल्कि स्वच्छन्द वृत्ति होना ही इतिदहाखका मर्म प्राप्त होना मानते ই) শি पूष इतिहासोंमें यादि 1क्रिसी व्यक्तिके बल विक्रमका विशेष पारेचय पाया जाय तो झट उसे कसित मानते हे, फर आज. बलै विषयमे तो प्रोफेखर হামমাধীন $] बलकी असम्भवताका सम्भव कर दिखाया हें कि आप चढती हुई बडी मोटर- ' कारका हाथसे पकड कर थाम छते हैं, छातीपर हाथीपेर रखकर चढा जाता है, | पर इस महापुरुषको कुछ पीडा नहीं होती । इस्री प्रकार यांदें दखरे विचारों उन्नति /॥ की जायते क्या पुरानी खामग्री हमको असम्भव प्रतीते होगी ९ कर्भा नहीं, इस राज स्थानके इतिहासे साथ रजवाडके सिवाय भारतके अन्य प्रान्तेंका भी तथ्य वर्णन ६, आ जाता है, इन्द्रप्रस्थकी परानी बातेंका बहुत कुछ पता छग सकता है। जोधपुर,बीका- ६ नेर, जैसलमेर, जपुर, कोटा, वूदी इन कई एक पुरातन राज्योंका इसमें बडी खोजके साथ अदिस वर्णन किया गया है में समझता हूँ कि मेवाड और मारवाड राज्यका तो आदश मानो सज्जनोंके सन्‍्मुख तथ्यरूपसे उपस्थित हो गया हें इस दसरे भागमें इन राज्योंके चरित्र किस प्रकारंस सघटित है, किस २ भाँतिकी विपत्तियोंका सामना इस देशके नरपातियोंकों आया हे, अथवा कभी २ नरपातैकी अयोग्यतासे ५ न एए ५ ७ 2, ज० ५४५ :०४ 2 न




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