श्री पंचेद्रीय संवाद | Shri Panchodriy Sanvad

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Shri Panchodriy Sanvad by मूलचंद किसनदास कपाडिया -Moolchand Kisandas Kapadiya

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मूलचंद किसनदास कपाडिया -Moolchand Kisandas Kapadiya

Add Infomation AboutMoolchand Kisandas Kapadiya

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
९९ याउदते गहराने नवध्नर्भानच' श्रवणु भरणु सभये अरण्य, तेना असाध्या स्वयम देव ठत्पनन थये।, १णी (थ ९| > ९५१ नवपम्‌ जना श्रचयुध्‌ा/ सरता सती इत्पन थध, लेक सेना सनेऽ मन्‌ युट्‌ भाराभा छे 5 प्टने। এগ আব এন, मेम्‌ नथी. छन्‌ দেশ विदा अतत य ५४ नथ, নাজ) আজ] नथ, ৭ গধু धन बिना তু) খু এ খন পথ. 2৯11 ৬9 লই এআ पहीने 5७ ते। जनत्र भेद मे, र, এ, विधाधरे। बीणेरे मदान सापततिना घारणु ६२५ बाणाओ। ৭1 এল श्रवणु उसवाथी सबस्व ২9 ৪৮ দখল জগ এ नण २। 6१७८ परी. আহহ ह~ वदमान वर्या छे भारी साथे तंडाजरी ०२।५ तमा ४ इे। तेम नथी উদন্াহ ৩ ৯1 2১2৩ ৭৮৯ 587 घराव' छा न= समने २१५ (বশ) খু) এড) এ ৯ रा बिना ते 2৬ জ সু 2 तम्‌ ৮:15 नना तथा नाठन्‌। सता 9৮5৮২ন৮ विनर! सांशणी {पने ०५० ৩11 এ) ৭ আছ (গু जी जएछ सगे शुस्साना मावशनभा सावी नने ५९५ 5120 $--- ৫ ०१ ৯.৯ 2৩৯1 ৮৩5৮৪ 5518 चलत्‌ भान्‌ + छ जावु मिध्या शुभान श' 5री ২৬৯8? এ ७०




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now