पुरुषार्थ | Purusharth

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : पुरुषार्थ  - Purusharth
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

Author Image Avatar

बाबू जगनमोहन वर्मा जी का जन्म सन् 1870 ई ० में हुआ। वे अपने माता पिता के इकलौती संतान थे। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बहुत ही प्रतिष्ठित एवं शिक्षित परिवार में हुआ। वे बचपन से ही विलक्षण बुद्धि के थे। ये हिंदी शब्द सागर के भी संपादक थे। इन्होंने चीनी यात्री के भारत यात्रा के अनुवाद हिन्दी में किया। इनके पास एक चीनी शिष्य संस्कृति सीखने आया जिससे इन्होंने चीनी भाषा का ज्ञान अर्जित किया एवं उसके यात्रा वृतांत का अनुवाद किया। उनके इस कोशिश से हमें प्राचीन भारत के समय के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक को जानने में काफी मदद मिली।

Read More About Jaganmohan Verma

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
| হই |जिसका प्रचार किसो देश की सीमा मात्र के भोतर होता है। एक ही देश, एक ही आचार, जो एक काल में धर्म या कालांतर में अधर् हो जाता है । यही नहीं, किन्तु कोई জম जो एक काल म गताञुगतिक रुप में धर्म होता है, दूखरे काल में अधमे ठदरता है; या वास्तविक रूप मे जो एक काल में घर्म या अधर्म होता है, काल्ांतर में अधघम या धर्म हो जाता हे। अथवा एक काम जो किसी समय गतालुगतिकओर वास्तविक रूपमे धम हो, कालांतर में गतालुगतिऋ मेंधर्म बना रहे ओर वांस्तविक रूप में अधर्म हो जाय | सारांश यह है कि देशकाल के अनुसार उनमें परिवर्तन इआ करता है । |किसी समाज के संघटन ओर उस पारस्परिक सहका- सरिता के अनुसार ही जिसकी आवश्यकता उस समाज को हो, कोई क्म भत्ता या बुरा हो सकता है। समाज का संघटन सहकारिता के भेद से दो प्रकार का होता हे--एक एकतंत्रऔर दुखरा खर्वतंत्र | एकतंत्र समाज संघटन की आवश्यकताउस समाज की वियोधिय से रक्षा करने ओर अन्य समाजोंको अपने अधघीनता में लाने के लिये पड़ती है। इसमें समाजके प्रत्येक व्यक्ति को पक प्रधान की श्रधीनता में रहकर उसकी... इच्छा के अज्जुसार काम करना पड़ता दहै) पूवे काल में प्रायः सभी जातियों को या तो आक्रमणकारी जातियों से अपनीअच्ता करनी पड़ती थी अथवा अन्य ज्ञातियों पर विज्य प्राप्त




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now