दर्शन- परिभाषा-कोश | Darshan Paribhasha Kosh

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Darshan Paribhasha Kosh by डॉ. गोवर्धन भट्ट - Dr. Govardhan Bhattहरबंशलाल शर्मा - Harbanshlal Sharma
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पुस्तक का साइज़ :4.63 MB
कुल पृष्ठ :436
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डॉ. गोवर्धन भट्ट - Dr. Govardhan Bhatt

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हरबंशलाल शर्मा - Harbanshlal Sharma

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दर्शन-परिभाषा-कोश साफएटपंबश्वे 5ड0टांडा मॉफिकटपेंघषि€ तस्‍ीपिपि0त शपि्रह्पी0आ बधि0डश्शश55 संक्षिप्त न्यायवाक्य बहू न्यायवाक्प जिसकी एक या दो प्रतति- शप्तिया सुगम होने के कारण व्यक्त न की गई हों । उदाहरण --मनृप्य मरणशील है श्र क एक मनुष्य है । यहा निंप्कर्ष क मरणशील है व्यक्त नहीं किया गया है । संक्षेपक प्ररिभाषा गणित्तीय तकंशास्त्र में वह परिभाषा जो यह बताती है कि श्रमुकः प्रतीक झमुक सूबे का संक्षिप्त रुप है. और उसके स्थान पर प्रयुक्त होगा 1 झपगमन 1. श्ररस्तू के तकंशारुत्र में बह न्यायबाक्य जिसमे साध्य-ग्राधारिका सत्य होती है किन्तु पक्ष-श्राघारिका केवल प्रसंभाध्य होती है श्रौर फलत निप्कर्ष भी प्रसंभाव्य हो होता है । 2. पे फल के अनुसार तर्क का एक प्रकार जिसमें तथ्यों के समूह विशेष से उनकी ध्याद्या करने वाली प्रावकल्पना प्राप्त की जाती है । अजीवात्‌ जीवोत्तसति यह मान्यता कि जड़ पदार्भ जोवों का प्रादुमीव होता है ।




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