अनघ | Anagh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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न चारमघ~-अनघमानो न ओर प्रमाद +यह आज की है याद । टै बगैं जिनका सन्य ঃ अनुचित उन्हे है देन्य यह है उन्‍्हीकी रीतिमेट अधम्म, अनीति । ठहरो; चर्रू में श्राप; लेकर तुम्हारा पाप--+यह जन हुआ म्रियमाण $ भरसक कर मै त्राण । अवसर नही अब ओर , অভ है कहीं इस ठोर ए होता यहाँ यदि नीरतो कृषि न हाती वीर !ই জীব बस, वे स्तूप ;तो मे खनू्‌गा करूप ।मेरा वदी व्यायाम ; जिससे कि हो कुछ काम । ( मूच्छित जन को सावधानी से उठाकर मघ का प्रस्थान )तोसरा षोर- टटा हदा ! यह हाथ !নীপা লীमेरा उसीके साथ !




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