प्रगतिवाद एक समीक्षा | Pragativad Ek Samixa

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : प्रगतिवाद एक समीक्षा - Pragativad Ek Samixa

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about धर्मवीर भारती - Dharmvir Bharati

Add Infomation AboutDharmvir Bharati

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
त्र प्रगतिवाद : आने लगती है जिसके जहरीले प्रभाव से साहित्य भी नहीं बच पाता । ऐसी अवस्था में साहित्यिक के सामने एक ही रास्ता बच जाता है: वह पू जीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ अपनी आवाज बुलन्द करे, नई आनेवाली जिन्दगी के कदमों को सद्धारा दे, सबंहारा वग के युद्ध के विजय गीत गए. और उस भविष्य को समीप लाने में सहायता दे, जिस भविष्य का स्वामी होगा मद्दान सवंहारा बग, जो अ्रभी तक प्रबंचना और शोषण की श्ृंखलाओं में जकड़ा हुआ था । प्रगतिवादी साहित्यिक सवहारा वर्ग के युद्ध में कलम का मोर्चा सम्दाले, ओर अपने हृदय के रक्त से उन अ्रनजान शहीदों के गीत लिखे जिनके लाल जबान खून से कोलतार की सड़कों, या कालकोटठरियों के फर्शों पर नई जिन्दगी का इतिहास लिखा जा रहा है | वग-संघषं श्राधिक ढांचे की मूल भित्ति है, समाज-ग्यवस्था की मूल भित्ति है, शातन सत्ता की मूल भित्ति है, संस्कृति 2 मूल নিলি है श्रोर इसीलिए साहित्य की भी मूल भित्ति हें । प्रत्येक कलाकार अपने वग का प्रतिनिधित्व करता है, कम से कम उस बग का, जिससे सद्दानुमूति रहती है ( सद्दानुभूति शब्द का विशेष महत्व है | सम्भव हे एक लेखक आर्थिक रूप से सम्पन्न हो लेकिन उसकी सह + अनुभूति हो प्रोलेदेरियत; या वद हो निधन पर उसकी सह + अ्रनुभूति हो बोजुश्रा ।) इसलिए माक्सवादी कलाकार का कतब्य है कि वह जनता के साथ अ्रपने को रक्खे, जनता की भावनाएँ, उमंगें, कल्पनाएँ ओर सपने कलाकार की भावनाएँ, उमंगे, कल्पनाएं और सपने बने । माक्सवाद के अनुसार वही कला महान होती है जिसमें जनता का महान आन्दोलन सीना उभारता हुआ नजर आए, जिसमें नई जिन्दगी ग्रंगड़ाइयाँ ले रह्दी दो, जिस पर नई मानवता के सपने अपने उजले पंख फैला कर छाॉँद्व किए हों। जो कलाकार जनता से श्रपने को अलग कर लेता है, वह श्रपनी वैयक्तिक विकृतियों मे उलभ कर या तो पतनोन्‍्मुख साहित्य का सुजन करता है, या श्रपने वग-स्वाथं मे




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now