प्रवीन पथिक | Pravin Pathik

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
264
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)তাল
৮पर से उतरा आर
इन छोगों के जाने चाद चह বানী ঘা জী নর पर से उतरा है
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तट सं जाकर एक फोपरी मे धुमा জী बहुत से रस्त की শান্ত ম
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थी । रुपये को उसने जमोन पर कं दिया सर অই উ নীতা, লকसोल ' मुझे उस्तके हाथ से रुपया लेता पडा जिसको में अपना जानी
टुइनन समके था जौर जिससे बदला रेने फे लिये कसम खा चुका
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उठा लिए बोर पूछा, “क्यों दोस्त ! तुम्हें किस बात का रज हुआ :”
२० । इुछ नहीं, लो तुम अपने कपडे छो और मेरे कपडे मुझे दोके ৭ जिसमें ২৩ ৯৯,
प्र दोड सा पानी भो छा दो जिसमें में अपने बदन आए सिर की
मिट्टी थे, दालू ।| ও रत
देहा० । क्या ठु्दारा वह काम नहीं हुमा जिसके दिये तुम्हे प्रत
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देर रयम हयियार सोर घोडा रे माओ |
एस भोषडी के मालिझ ने चैषादी क्षयि सौरं वड् ्रुडा दाय सुह
धो घोर श्षएना टिवास पदिन घोडे पर सवार दो गया घव घग्र मख-
दीन ट्से देपतातो साफ पहिचान जाता क्योंकि यह वही বাজী গা
जिएपगे दोटी देर पहिएे उपका मुकाविछा किया था ।
प्षणादोन छने दोनों सुनाहवों के साथ उसी सठक पर दल पदा
+ धर गाजी ने धोखा देकर उन्हें बहकाया या जाने को कहा था सगर
इन रोणो से इस बूटे के बारे से আত হীন বা ।
रेया०। क्या जापदे उसफो वढमारी पर ध्यान नहीं दिया २ जपनो
-৩। মিতা थे देटों के साध सेरता था और आपकी बात का जवाब
४5५ उए प्व कर नहों दिवा, किप वेपरवाही के साथ उसने राह बतलाई!
ই শী शरपओ इशारे दे साथ दुछ হী माटूम होती ची ।
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