हारूंगी नहीं | Harungi Nahi
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
44 MB
कुल पष्ठ :
185
श्रेणी :
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No Information available about श्री दिव्जेन्द्रनाथ मिश्र - Shri Divjendranath Mishr
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)1 माण ण त कामो जत त त मात त नति त ता ममम म त ण ति भे म त ना व वन श च
' साबुन क् १५
ऊपर पानी बन्द हो गया था। ऊपर वाली सेडानी . यह बाल्टी
लगाये खड़ी थीं । हँस कर बोलीं--' म्हाने भर लेने दो, जी !*'
द्यामा पानी लेकर खौटी, तो सुखदेव खा चुका था। अचरज से
बोली--- खा चके ? दो परावँंठों से ही पेट भर गया !”
पर सुखदेव ने जल्दी-जल्दों पानी पिया और जलल््दी-जल्दी कमीज
पहन कर पैरों में चप्पल डाल कर खड़ा हो गया रसोईघर के सामने ।
হসালা जठी थाली लेकर बाहर निकली और उसे यों खड़ा देख
तो रुक गयी । द
सुखदेव ने हौले से कहा-- भाभी !
भाभी हौले से बोलीं--- क्यों, क्या हे ?
“भाभी, आज बहुत अच्छी फिल्म आयी है ।'
“तुम जा रहे हो ?'
“पैसे नहीं हैं !
भाभों ने सोचकर कहा-- चौदह आने से काम चल जायेगा :
चौदह आने हैं मेरे पास ।
“खा, काभ !??
द्यामा ने थालो वहै रत्र दी ओर दौडी जाकर वक्सेमेसे चौदह
आने निकाल लायी और देवर की जेब में वे चौदह आने डाल कर होले
से बोली---' वह उधर वाली साँकल खटखटाना । লী আমবী रहूँगी।
सुखदेव ने हौले से कहा--“अच्छा । भाई साहब पूछेंगे, तो क्या
कहोगी ? ।
श्यामा ने हौलेसे का~ कह दूँगी कि प्रोफेसर शर्मा के यहाँ
गये हैं ! |
सुखदेव ने प्रसन्न होकर कहा--'बस-बस, यही कह देता ।” और
दरवाजे की ओर दबे पाँव बढ़ा और चौखट के पार हो गया। फिर
किवाड़ों पर मेँह रखकर हौले से पुकारा-- भाभी !”
পু तयर ता न आर
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