अपलक | Apalak

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Book Image : अपलक  - Apalak
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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थक्ितसागरुज्य याञ्चाफिर वहीक्या न सुनोगे विनय हमारी ! उड़ गए तुम निमिष भरम तेरा मेरा नाता स्याह!पण्ढ सिहाबलोकनसखे !हम हैं मरत फक्कीरभिय, त्वम-मय कर दो मम तन-मन प्राण, तुम्हारे कर के कंकण सजन, करो सन्तत रस-वषेण तुम न आना अतिथि बनकर मेरे भौन लगी आगआओ, प्रिय हृदय लगोमेरा क्या काल कलन !बदु रहा दै भार मेराआा जाओ, प्रिय, साकार আলী विस्मरणसखि, वन-वन घन गरजे तिमिर-भारअस्तित्व-नावनयनन नीर भरेनिराशा क्यो हिय मथित करे ९ घन-गजेन.ज्ञणपलक चख चमक भरो५६ ५८ ६० ६२ ६४ ६६ ছল७१ ५७४ ७६ নে८२ ८४ ८६ ८८६९ ६४ ६६ ६य १०० १०३ १०४ १०७




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