सामान्य भाषाविज्ञान | Samanya Bhasha Bigyan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
17 MB
कुल पष्ठ :
435
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand){ १५ )
(५८) एक ही विचार के गचक दो बब्दा (५८-१९) या হী वाक्य-विन्यासौ
বা জিনতা (५९) वया विदेणी शब्दों का स्वदेशी परिचित शब्दों से मिछला-
जुलता उच्चारण (५९-६० ) ।
হলনা अध्याय--ध्वतियत्र पृ० ६१-६७
ध्वनि यंत्र (६१) श्वास की विचित्र विक्रति से -वनिसष्टि (६२) उवास-
नालिका तथा भोजननाछिका (६२ ), स्वस्यत्न तथा स्वरतन्त्रियों की चार विभिन्न
स्पितियाँ (६२-६३ ) । ध्वनियत्र के विभिन्न अवयव--सुखविवर आदि (६३)
अलिजिद्न की तीन विभिन्न अवस्थाएँ (६३-६४ ) , जीभ की विविध अवस्थाएँ (६४-
8५), इस प्रकार स्थानभेद व प्रयत्नभेद से अनन्त व्वनियों की सृष्ठि (६६) |
घ्वनि का लक्षण (६६) तथा तीन अवस्थाए (६६) , प्रो० डेनियल जोन्स के मत
से ध्वनि का लक्षण (६६-६७) । व्वनिग्नाम (६७) |
ग्यारह॒वों अध्याय--ध्वनियों का वर्गीकरण पु० ६८--७६
स्थान तथा प्रयत्त पर ध्वेनियोका द्विता वर्गीकरण (६८) । स्वर तथा
व्यनन (६८-६९) और उनके लक्षण--प्राचीन (६९) तथा आधुनिके (६९),
स्वर तथः व्यजन का मेद (६९-७०) । स्वरो का वर्गकिरण (क) जीभ के विभिन्न
स्थाना पर--अग्र, मध्य तथा प्च स्थान (७०) तथा (ख) मुख वै खुलने पर सुभ,
चिवृते, अथसवृतं तथा अधविवुत (७०-७१) । व्यजनों का वर्गकिरण (कर)
संघोष तथा अधांप (७२), (ख) द्रयोष्ट्य, दन्त्योष्ट्य, दन्त्य, वत्स्य, तारुव्य,
मैय, अद्िजिह्गीय, उपाछिजिह्खीय तथा स्वरथतर-स्थानीय (७३), (ग) प्रयत्न
भेद से---स्पश सपर्षी, पाश्विक, छोडित तथा उत्क्षिप्त (७३-७४), (घ) निरनु-
नासिक तथा अनुतासिक (७४-७५) । य् और व् के दो रूप (७४), अल्पप्राण और
महात्राण (७५)। मुख्य तथा गौण स्थान (७५-७६) ।
बारह॒वाँ अध्याय--ध्वनियों के गुण पु० ७७.८१
मात्रा, सुर् मौर बलाघातत (७७) । मात्रा के तीन प्रकार--हुस्व, दीघं तथः
प्ुत { ७७), हृम्वत्व दीघत्व का निणय (७८), मात्रा को मकित करने के साधन
(७८-७९) | सुर---उच्च, नीच तथा सम (७६) इसका भाषाओ मे प्रयोग
(७९-८० ) | बछाधात उसके प्रयोग तथा प्रयोग के नियम (८०) । इन गुणां का
भिन्न भिन्न भाषाओ मे भिन्न भिन्न प्रयोग (८०-८१ )
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