श्रीरामचरितमानस | Shri Ram Charit Manas
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutGosvami Tulaseedas
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
26 MB
कुल पष्ठ :
650
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about गोस्वामी तुलसीदास - Gosvami Tulaseedas
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १३ |]चिन्तन करते हुए यदि प्रश्नावढीके # इस चिहसे संझुक्त 'म? वाले
कोष्ठकर्में अंगुली या शब्गका रक्खा ओर वह ऊपर बताये क्रमके
अनुसार अक्षरोंकों गिन-गिनकर लिखता गया तो उत्तरखरूप यह
चोपाई बन जायगी----
हो इहसोईजोरामःः रचिराखा।
को कू रित रफ बढ़ा व हिं साषा॥
यह चौपाई बालकाण्डान्ततत शिव और पावतीके संवादमें
हैं | प्रश्नकर्ताको इस उत्तरखरूप चोपाईसे यह आशय निकालना
चाहिये कि काय होनेमें सन््देह है, अतः उसे भगवानपर छोड़ উলা
भ्रयस्कर है ।
इस चोपाईके अतिरिक्ति श्रीरामशलाका-प्रश्नावडीसे ओर भी
जितनी चोपाइयों बनती हैं, उन सबका स्थान ऑर फलसहित
ल्लेख नीचे किया जाता है |
।>सुछु सिय सत्य असीस हसारी । पूजहि. मन कामना तुम्हारी ॥
सथान-यह चोपाई वाट्काण्डयें श्रीसीताजीके गोरीपजनवेः प्रस्खमे
है । गोरीजीने श्रीसीताजीको आशीर्वाद दिया ই |
फूल-प्रइनकर्ताका प्रश्न उत्तम है, काय सिद्ध होगा |
२-प्रविसि नगर कीजे सब काजा । हृदय राखि कोसलपुर राजा ॥
सथान-यह चौपाई घुन्दरकाण्डमें हनुमानजीके लंकामें प्रवेश करनेके
समयकी है ।
फूल-भगवान्का स्मरण करके कायारम्भ करो, सफक्ता मिलेगी ।
३-उघरें अंत न होइ निबाहू | कालनेस जिसि रावन राह ॥
स्थान-यह चोपाई बाल्काण्डके आरम्भमें सत्सड्रवणनके ग्रसझमें है ।
फल-इस कायमें भछाई नहीं है | कायकी सफल्तामें सन्देह है !
User Reviews
No Reviews | Add Yours...