सार्वजनिक अर्थ | Sarwajanik Artha

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Sarwajanik Artha by प्रोफेसर केदारनाथ प्रसाद - Professor Kedarnath Prasad

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about प्रोफेसर केदारनाथ प्रसाद - Professor Kedarnath Prasad

Add Infomation AboutProfessor Kedarnath Prasad

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
द ओ = चिषय » . ` ष्ठ विवेचन--शच्रधिकतम सामानिक.लाम वनाम न्यूनतम सम्पूरणं परित्याग सिद्धान्त ॥ छ- तदे अट्ठम अध्याय कर-प्रणाली की कुछ समस्याएं 0 (8০209 6০19705 ০£ ৮০৪ গু, 95965) एक र की प्रणाली बनाम श्रनेक करो कौ प्रणाली--श्रच्छी कर- पणाली के तच्ण । দল नवम अध्याय आधुनिक सार्वजनिक अथैनीति की प्रवृत्तियाँ 4 फ०फते8 17 ०१6०0 एपऑं० 200০০ ) 15৯78 दशम अध्याय , कर देने की सामथ्ये ( १85६००1० 09798०1५9 ) ६७-- १०४ एकादश अध्याय कर के भेव्‌, उसका संपतन, हस्तान्तर, और संवदन या संघात < ए0ष8 01 69০ [592 वग्रए७०, 8101108 876 ५ 1०७७०८९ ) परिसाषाए --अत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर--प्रत्यकज्ष करों की विशेषताएँ और त्रुव्या--अग्रत्यक्ष करों की विशेषताएँ और दोष--विक्रय-कर की समीक्ता--करों के कुछ और बर्ग। ॥ १०५--११८




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now