सर्वोदय - तत्त्व - दर्शन | Sarvoday - Tattv - Darshan

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
403
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)चौदहउनके जीवनकाल मे ही सर्वोदिय-तत्व-दर्शन की रूपरेखा ज्ञात हो सकती
थी । सर्वोदिय-तस्व-दर्शन का विकास मूलभूत सिद्धान्तों में परिवर्तन के रूप में
नहीं दो रद्दा था, बह्कि सिद्धांतों के ब्यावह्गरिक विवेचन के या तफ़्सील की
बातों सें देर-फेर के रूप में। सन् १६३८ में हिंद-स्वराज्य? के बारे में उन्होंने
कहा था, “तीस साल के तूफानी गीवन के बाद जिसमें से होकर में तथ
(१६०६) से गुजर चुका हूँ मैंने ऐसा कुछ सी नहीं देखा जिसके काश्ण मुक्ते
डन सिद्धांतों में परिवर्तन करना पढ़ा हो जिनका उसमें प्रतिपादन है ।!”१. ्एरियन पाथ' सितम्बर १६३८ ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...